उत्तर प्रदेश

FalseFIR – झूठे मुकदमों पर बढ़ेगी सख्ती, अब शिकायतकर्ता पर भी होगी कार्रवाई

FalseFIR – झूठे मुकदमे दर्ज कराकर व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने की प्रवृत्ति पर अब सख्ती बढ़ाई जा रही है। उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद पुलिस महानिदेशक ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि जांच में कोई शिकायत गलत पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता और संबंधित गवाहों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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जांच में झूठ साबित होने पर होगी कार्रवाई
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी एफआईआर में दर्ज तथ्य जांच के दौरान गलत साबित होते हैं और पुलिस उस मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाने का निर्णय लेती है, तो ऐसे मामलों को केवल बंद नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, शिकायतकर्ता और झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके लिए संबंधित धाराओं के तहत अदालत में परिवाद दाखिल करना अनिवार्य किया गया है।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज मामलों में भी नियम लागू
यह नियम उन मामलों पर भी लागू होगा, जहां अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई हो। यदि ऐसे मामलों में भी जांच के दौरान आरोप असत्य पाए जाते हैं, तो शिकायतकर्ता के साथ-साथ उन गवाहों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जिनके बयान दर्ज किए गए हों। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग न हो।

कब शुरू होगी प्रक्रिया
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रक्रिया तब शुरू होगी, जब अदालत पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर ले और शिकायतकर्ता द्वारा दायर आपत्ति भी खारिज हो जाए। इसके बाद संबंधित थाने को तत्काल कार्रवाई करते हुए अदालत में परिवाद दाखिल करना होगा।

निर्दोष शिकायतकर्ताओं को नहीं होगी परेशानी
पुलिस को यह भी कहा गया है कि हर मामले में सावधानी बरती जाए ताकि वास्तविक पीड़ितों को कोई नुकसान न पहुंचे। यदि किसी मामले में साक्ष्य के अभाव में रिपोर्ट बंद की जाती है, लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा जानबूझकर गलत जानकारी देने का प्रमाण नहीं मिलता, तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

रिकॉर्ड रखने और निगरानी के निर्देश
इन मामलों की निगरानी के लिए पुलिस विभाग को अलग रजिस्टर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। थानों में झूठी शिकायतों का रिकॉर्ड रखा जाएगा और उच्च अधिकारी समय-समय पर इसकी समीक्षा करेंगे। इसके अलावा, हर महीने इन मामलों की प्रगति की रिपोर्ट अदालत को भी भेजी जाएगी।

लापरवाही पर अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी इन आदेशों का पालन करने में लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य न्याय प्रणाली में पारदर्शिता लाना और कानून के दुरुपयोग को रोकना है।

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