GangaExpressway – अप्रैल–मई में खुल सकता है यूपी का 594 किमी लंबा मेगा प्रोजेक्ट
GangaExpressway – उत्तर प्रदेश की बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी इस सड़क परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो गया है और अब इसके उद्घाटन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बचे हुए कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने साइट पर काम की गति और बढ़ा दी है। अधिकारियों का अनुमान है कि यदि शेष काम तय समय पर पूरा हो गया तो एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अप्रैल या मई में किया जा सकता है।

निर्माण कार्य लगभग पूरा, फिनिशिंग का काम जारी
सरकारी अधिकारियों के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे का करीब 97 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। अब परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए फिनिशिंग और सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रियाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद यूपीडा के वरिष्ठ अधिकारी लगातार विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि सभी तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी वजह से अंतिम चरण में सड़क की सतह, संकेतक, सुरक्षा बैरियर और अन्य जरूरी सुविधाओं को सावधानीपूर्वक स्थापित किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि उद्घाटन से पहले हर व्यवस्था पूरी तरह से तैयार रहे ताकि एक्सप्रेसवे शुरू होते ही यातायात सुचारु रूप से संचालित किया जा सके।
ट्रायल रन और टोल सिस्टम की जांच पूरी
यूपीडा से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर ट्रायल रन और टोल सिस्टम की तकनीकी जांच पहले ही पूरी की जा चुकी है। इन परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सड़क की संरचना, यातायात प्रबंधन और टोल कलेक्शन प्रणाली बिना किसी बाधा के काम कर सके।
इन परीक्षणों के दौरान वाहनों की आवाजाही, सुरक्षा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की कार्यक्षमता का भी आकलन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई हैं। इसी वजह से अब प्रशासन को भरोसा है कि उद्घाटन के बाद एक्सप्रेसवे पर नियमित यातायात शुरू करने में किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ेगा नया मार्ग
करीब 594 किलोमीटर लंबा यह सिक्स लेन एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। यह मेरठ से प्रयागराज तक फैला हुआ है और राज्य के पश्चिमी तथा पूर्वी हिस्सों को सीधे जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग बनेगा। इसके चालू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक्सप्रेसवे से व्यापार, उद्योग और पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। तेज और सुगम सड़क संपर्क मिलने से माल ढुलाई आसान होगी और कई जिलों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। राज्य सरकार का दावा है कि इतने बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क के साथ उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख सड़क अवसंरचना वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था
गंगा एक्सप्रेसवे को केवल तेज यात्रा के लिए ही नहीं बल्कि सुरक्षित यात्रा के लिहाज से भी तैयार किया जा रहा है। सड़क के किनारे आपातकालीन सेवाओं के लिए ट्रॉमा सेंटर, पुलिस चौकियां और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
इसके अलावा सड़क पर आधुनिक संकेतक, निगरानी प्रणाली और नियमित पेट्रोलिंग की व्यवस्था भी होगी। इन सुविधाओं का उद्देश्य दुर्घटनाओं की स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराना और यात्रियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
मेरठ से मुरादाबाद और बरेली की दूरी भी घटेगी
इस परियोजना का लाभ केवल मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा करने वाले लोगों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि आसपास के कई जिलों के लिए भी यह मार्ग सुविधाजनक साबित होगा। एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाले इंटरचेंज के जरिए मेरठ से मुरादाबाद और बरेली जाने का रास्ता भी पहले की तुलना में आसान हो जाएगा।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार मेरठ के बिजौली क्षेत्र से गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से सिंभावली इंटरचेंज तक पहुंचने के बाद दिल्ली–लखनऊ हाईवे से कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी। इससे मुरादाबाद और बरेली की यात्रा में करीब 20 से 25 किलोमीटर की दूरी कम हो सकती है।
नई कनेक्टिविटी के कारण यात्रियों को पुराने भीड़भाड़ वाले मार्गों से राहत मिलने की उम्मीद है। तेज और चौड़ी सड़क मिलने से यात्रा का समय घटेगा और सड़क परिवहन अधिक सुगम हो सकेगा।



