उत्तर प्रदेश

Groundwater Contamination Risks: नसों में जहर बनकर दौड़ रहा है ग्रेटर नोएडा का पानी, खतरनाक धातुओं से पनपा कैंसर…

Groundwater Contamination Risks: ग्रेटर नोएडा की चकाचौंध के बीच एक डरावनी सच्चाई सामने आई है, जिसने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है। एक हालिया शोध में खुलासा हुआ है कि यहां की जमीन से निकलने वाला पानी अब जीवनदायी नहीं, बल्कि जानलेवा बन चुका है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी और एकेटीयू के विशेषज्ञों ने (Scientific Research Findings) के जरिए यह चेतावनी दी है कि इस भूजल का लंबे समय तक सेवन शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। शोध के नतीजे इतने भयावह हैं कि इन्हें नजरअंदाज करना आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा।

Groundwater Contamination Risks
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मानक से 60 गुना ज्यादा क्रोमियम का खतरनाक खुलासा

विशेषज्ञों की टीम ने ग्रेटर नोएडा के दुजाना, साधुपुर और बिसनौली जैसे गांवों से पानी के नमूने एकत्र किए थे। जब इन नमूनों की लैबोरेट्री में जांच की गई, तो पता चला कि मॉनसून के बाद पानी में (Toxic Heavy Metals) की मौजूदगी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विशेष रूप से क्रोमियम की मात्रा निर्धारित सुरक्षित मानक से लगभग 60 गुना अधिक पाई गई। इसके साथ ही कैडमियम जैसी विषैली धातुओं का स्तर भी खतरे के निशान से ऊपर मिला, जो इंसानी शरीर के लिए किसी धीमे जहर से कम नहीं है।

कैंसर रोगियों के खून में मिले डरावने आनुवंशिक बदलाव

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के बायो साइंसेज विभाग के डीन प्रो. डॉ. अभिमन्यु कुमार झा के नेतृत्व में यह शोध दो वर्षों तक चला। शोधकर्ताओं ने प्रभावित गांवों के 25 कैंसर रोगियों के ब्लड सैंपल्स का बारीकी से विश्लेषण किया। इस (Genetic Mutation Analysis) के दौरान यह पाया गया कि 64 प्रतिशत रोगियों के जीन में विशिष्ट परिवर्तन हो चुके हैं। ये आनुवंशिक बदलाव शरीर की स्वाभाविक रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर रहे हैं, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ गया है।

भारी धातुओं का शरीर के अंगों पर सीधा प्रहार

प्रोफेसर झा के अनुसार, पानी में मौजूद क्रोमियम और कैडमियम सीधे तौर पर शरीर के प्राकृतिक कैंसररोधी तंत्र को निष्क्रिय कर देते हैं। यह प्रक्रिया (Cellular DNA Damage) का कारण बनती है, जिससे शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित होकर कैंसर का रूप ले लेती हैं। यह शोध अक्टूबर 2025 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘क्लीनिकल एपीजेनेटिक्स’ में प्रकाशित हुआ है, जो इस संकट की गंभीरता को वैश्विक स्तर पर प्रमाणित करता है। शोधकर्ताओं ने साफ कहा है कि यह पानी अब किसी भी स्थिति में पीने योग्य नहीं बचा है।

गुर्दे और लिवर को चुपचाप बर्बाद कर रहा है यह जहर

रिसर्च टीम में शामिल एकेटीयू के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दूषित भूजल का असर केवल कैंसर तक सीमित नहीं है। यह जहरीला पानी (Human Organ Health) पर भी सीधा हमला कर रहा है, जिससे गुर्दे, लिवर और फेफड़े धीरे-धीरे काम करना बंद कर रहे हैं। डॉ. गौरव सैनी और रुनझुन माथुर के अनुसार, ये भारी धातुएं हड्डियों और महत्वपूर्ण अंगों में जमा हो जाती हैं, जिनका असर सालों बाद गंभीर बीमारी के रूप में सामने आता है। यह एक ऐसी स्वास्थ्य त्रासदी है जो पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है।

औद्योगिक कचरा और दूषित पानी का घातक गठजोड़

विशेषज्ञों ने इस गंभीर स्थिति के लिए औद्योगिक अपशिष्ट के गलत निस्तारण को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि (Industrial Waste Monitoring) को सख्त किया जाए और भूजल स्रोतों की हर महीने जांच हो। फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल बिना शोधन के जमीन में जा रहा है, जो बारिश के पानी के साथ मिलकर भूजल को जहरीला बना रहा है। जब तक औद्योगिक कचरे के प्रबंधन पर कड़ी निगरानी नहीं होगी, तब तक स्वच्छ पेयजल का सपना अधूरा ही रहेगा।

स्वच्छ पेयजल के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की पुकार

शोधकर्ताओं ने सरकार और प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि (Public Health Crisis) को रोकना है, तो ग्रामीणों को बोरवेल के पानी पर निर्भर रहने से रोकना होगा। शोध के निष्कर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना फिल्टर किए जमीन का पानी पीना अब सीधे मौत को दावत देने जैसा है। प्रशासन को इस दिशा में युद्धस्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है ताकि मासूम जिंदगियों को बचाया जा सके।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का आश्वासन और भविष्य की योजना

इस गंभीर शोध रिपोर्ट के सामने आने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण भी हरकत में आया है। महाप्रबंधक परियोजना एके सिंह ने बताया कि सेक्टरों की तरह अब (Ganga Water Supply) को गांवों तक पहुँचाने का काम तेज कर दिया गया है। पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है और जल्द ही शेष गांवों को भी स्वच्छ गंगाजल उपलब्ध कराया जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि वे हर नागरिक तक सुरक्षित पेयजल पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हालांकि ग्रामीणों के लिए यह इंतजार उनकी सेहत पर भारी पड़ रहा है।

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