HighCourt – लंबित चार्जशीट पर जिला जजों को कड़ी चेतावनी
HighCourt – इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में आपराधिक मामलों की लंबित चार्जशीट को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने वर्षों से आरोप तय न होने वाले मामलों की जानकारी समय पर उपलब्ध न कराने पर कई जिला न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों की अनदेखी केवल औपचारिक चूक नहीं है, बल्कि यह न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला विषय है।

समय पर रिपोर्ट न देने पर आपत्ति
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने की। यह प्रकरण प्रयागराज निवासी उर्मिला मिश्रा की याचिका से जुड़ा है। अदालत ने 16 दिसंबर 2025 को प्रदेश के सभी जिला जजों को निर्देश दिया था कि वर्ष 2004 से 2024 के बीच दर्ज उन आपराधिक मामलों का वर्षवार ब्यौरा प्रस्तुत किया जाए, जिनमें अब तक आरोप तय नहीं हो सके हैं। प्रत्येक आपराधिक न्यायालय से अलग-अलग आंकड़े मांगे गए थे, ताकि स्थिति का स्पष्ट आकलन हो सके।
निर्धारित समयसीमा के बाद अदालत को 75 में से 49 जिलों की रिपोर्ट प्राप्त हुई। गोंडा और बरेली ने अतिरिक्त समय की मांग की, लेकिन 26 जिलों ने न तो रिपोर्ट भेजी और न ही समय बढ़ाने का अनुरोध किया। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी की।
अधूरी और अपूर्ण रिपोर्टों पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि कुछ जिलों की ओर से भेजी गई रिपोर्ट अधूरी है। हमीरपुर, मथुरा, बांदा, अमरोहा, हापुड़, पीलीभीत, उन्नाव, आजमगढ़, मुजफ्फरनगर, भदोही, सुल्तानपुर, रायबरेली और महाराजगंज की रिपोर्ट में आवश्यक विवरण नहीं पाया गया। अदालत ने यह भी कहा कि कई स्थानों पर दशकों से लंबित मामलों की कुल संख्या स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं की गई।
इसके अतिरिक्त बस्ती, अंबेडकर नगर, चित्रकूट, फतेहपुर, उरई, लखनऊ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, सिद्धार्थनगर, हरदोई, औरैया, मऊ, कुशीनगर, कन्नौज, बहराइच, बलरामपुर, रामपुर, अलीगढ़, ललितपुर, संत कबीर नगर, श्रावस्ती, सीतापुर, गाजियाबाद, महोबा, गाजीपुर, लखीमपुर, कानपुर और बिजनौर की रिपोर्ट को निर्देशों की पूर्ण अवहेलना बताया गया। अदालत ने कहा कि यह स्थिति प्रथम दृष्टया गंभीर है, फिर भी संस्थागत हित को देखते हुए अंतिम अवसर दिया जा रहा है।
कुछ जिलों के प्रयासों की सराहना
अदालत ने आगरा, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या से प्राप्त रिपोर्ट को निर्देशानुसार पाया। विशेष रूप से आगरा के जिला जज के प्रयासों की सराहना की गई। वहीं उन्नाव, कुशीनगर, कन्नौज, संत कबीर नगर, श्रावस्ती, सीतापुर, गाजियाबाद और हापुड़ में जिला जज के स्थान पर अन्य अधिकारी द्वारा रिपोर्ट भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई गई। न्यायालय ने कहा कि यह लापरवाही है या अवमानना, इस पर बाद में विचार किया जाएगा।
27 फरवरी तक अंतिम अवसर
हाईकोर्ट ने आगरा, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या को छोड़कर अन्य सभी जिला जजों को 27 फरवरी तक विस्तृत और निर्देशानुसार रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी चूक को गंभीरता से लिया जाएगा।
अमेठी को फिलहाल छूट
अमेठी जिला न्यायालय को इस प्रक्रिया से अस्थायी छूट दी गई है। अदालत ने बताया कि यह न्यायालय वर्ष 2011 से अपने मूल भवन में संचालित नहीं हो रहा है और हाल ही में 17 जनवरी को नए भवन की आधारशिला रखी गई है। इसी कारण उसे फिलहाल रिपोर्ट से छूट प्रदान की गई।
मामले में सहायता के लिए अधिवक्ता प्रतिमा विश्वकर्मा और जुबेरिया काज़मी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। साथ ही रजिस्ट्रार अनुपालन को आदेश की प्रति सभी जिला जजों को तत्काल प्रेषित करने का निर्देश दिया गया है।



