उत्तर प्रदेश

HostelInfrastructure – यूपी में छह नए राजकीय छात्रावासों को मंजूरी

HostelInfrastructure – उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में शैक्षिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से छह नए राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावासों के निर्माण को स्वीकृति दे दी गई है। यह निर्णय खासतौर पर उन विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर लिया गया है जो आर्थिक कारणों से सुरक्षित और व्यवस्थित आवास की सुविधा से वंचित रह जाते हैं। सरकार का उद्देश्य है कि पढ़ाई के दौरान छात्रों को रहने की चिंता न करनी पड़े और वे पूरी एकाग्रता के साथ अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।

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चयनित जिलों में शुरू होगा निर्माण कार्य

इन छात्रावासों का निर्माण प्रदेश के चुनिंदा जिलों में किया जाएगा। फिरोजाबाद, जौनपुर, हाथरस और सुलतानपुर जैसे जिलों को प्राथमिकता सूची में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, फिरोजाबाद में तीन छात्रावास बनाए जाने की योजना है, जबकि अन्य जिलों में आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग क्षमता वाले भवन तैयार किए जाएंगे। निर्माण कार्य को जल्द गति देने के लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

आरक्षण व्यवस्था के तहत सीटों का आवंटन

नई नीति के अनुसार छात्रावासों में सीटों का आवंटन विशेष आरक्षण मॉडल के आधार पर किया जाएगा। कुल क्षमता का 70 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित रहेगा। शेष 30 प्रतिशत सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों को अवसर मिलेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक संतुलित और समावेशी शैक्षिक वातावरण तैयार करना है। छात्रावासों में कक्षा 9 से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के विद्यार्थी प्रवेश ले सकेंगे।

आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित होगा परिसर

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के अंतर्गत बनने वाले ये छात्रावास केवल रहने की जगह नहीं होंगे, बल्कि इन्हें आधुनिक शैक्षिक परिसर के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रत्येक भवन में 50 से 100 बेड की क्षमता प्रस्तावित है। छात्रों के लिए सुसज्जित कमरे, स्वच्छ मेस, अध्ययन के लिए पुस्तकालय, मनोरंजन कक्ष और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। परिसर में छात्रावास अधीक्षक का आवास और गार्ड रूम भी बनाया जाएगा ताकि प्रशासनिक निगरानी बनी रहे।

नाममात्र शुल्क से मिलेगी सुविधा

छात्रों से प्रति माह केवल 25 रुपये का प्रतीकात्मक शुल्क लिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह राशि इसलिए निर्धारित की गई है ताकि छात्रवृत्ति संबंधी प्रक्रिया में कोई तकनीकी अड़चन न आए और विद्यार्थियों की पात्रता बनी रहे। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह शुल्क बेहद कम है, जिससे अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकेंगे।

बजट की कमी दूर करने के लिए अतिरिक्त सहयोग

इन परियोजनाओं का काम पहले वित्तीय कमी के कारण धीमा पड़ा हुआ था। केंद्र सरकार की ओर से प्रति छात्र तीन लाख रुपये के मानक पर 24.90 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन निर्माण लागत बढ़ने के चलते यह राशि पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में राज्य सरकार ने अपने बजट से 13.08 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान करने का निर्णय लिया है। इस ‘टॉपअप’ सहायता से अब निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।

शिक्षा तक पहुंच आसान बनाने की पहल

सरकार का मानना है कि सुरक्षित और सुविधाजनक आवास की उपलब्धता से छात्रों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सैकड़ों छात्रों को सीधे लाभ मिलेगा और उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच आसान होगी।

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