KanpurMandiRats – मंडियों में चूहों से निपटने की नई तैयारी तेज
KanpurMandiRats – कानपुर की थोक मंडियों में चूहों की बढ़ती समस्या अब प्रशासनिक एजेंडा बन चुकी है। शुक्रवार को आयोजित उद्योग-व्यापार बंधु की बैठक में कारोबारियों ने खुले तौर पर बताया कि चूहों के कारण उन्हें हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थिति को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने संबंधित अधिकारियों को जल्द ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

व्यापारियों का कहना है कि अनाज और अन्य खाद्य सामग्री को चूहे बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहे हैं। खासकर नौबस्ता गल्ला मंडी में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है। मंडी सचिव विजयन बलियान ने बताया कि चूहों को खत्म करने के बजाय उन्हें भगाने के लिए एक पेशेवर एजेंसी की सेवाएं ली जाएंगी।
टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होगी
मंडी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एजेंसी चयन के लिए दो से तीन दिनों में टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रस्तावित योजना के तहत विशेष केमिकल का छिड़काव किया जाएगा, जिससे चूहे मंडी परिसर से दूर रहें। इस व्यवस्था पर हर महीने लगभग 20 से 25 हजार रुपये खर्च आने का अनुमान है।
व्यापारी प्रतिनिधि ज्ञानेश मिश्रा ने बैठक में कहा कि चूहों के कारण मंडी को सालाना करीब दो करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। अनाज की बोरियों में कटाव, पैकेजिंग सामग्री की क्षति और भंडारण व्यवस्था में व्यवधान से यह नुकसान बढ़ता जा रहा है।
अन्य समस्याएं भी उठीं
सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में हुई बैठक में व्यापारिक क्षेत्रों से जुड़े अन्य मुद्दे भी सामने आए। एलएलआर तिराहे के पास अंडरपास की ग्रीन बेल्ट में दोबारा हुए अतिक्रमण पर उद्यमियों ने चिंता जताई। गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन मार्ग पर सड़क के बीच स्थापित ट्रांसफार्मर से आवागमन प्रभावित होने की शिकायत भी रखी गई।
बैठक में डीसीपी ट्रैफिक रविंद्र कुमार, प्रभारी एडीएम सिटी आलोक कुमार गुप्ता, उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने कहा कि औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को लंबित नहीं रहने दिया जाएगा।
निगरानी के लिए समिति गठित
समस्याओं के समाधान को व्यवस्थित रूप देने के लिए डीएम ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट तथा एसडीएम सदर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया। यह समिति परियोजनाओं की उपयोगिता और आवश्यकता की समीक्षा करेगी और अपनी सिफारिश के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
झकरकटी बस अड्डे के सामने क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के भी निर्देश दिए गए, ताकि आवागमन में बाधा न आए।
चूहे क्यों बनते हैं बड़ी चुनौती
चूहे केवल अनाज मंडियों तक सीमित समस्या नहीं हैं। ये घरों, गोदामों और खेतों में भी व्यापक नुकसान पहुंचाते हैं। अपने तेज दांतों से लकड़ी, प्लास्टिक और यहां तक कि तारों को भी कुतर देते हैं, जिससे संरचनात्मक क्षति और आग का खतरा बढ़ जाता है।
कृषि क्षेत्रों में फसलों को नष्ट करना और भंडारित अनाज को खराब करना भी आम है। इसके अलावा इनके मल-मूत्र से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
कानपुर प्रशासन का मानना है कि व्यवस्थित पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था लागू होने के बाद स्थिति में सुधार आएगा। फिलहाल मंडी के कारोबारी इस पहल से राहत की उम्मीद कर रहे हैं।



