LathmarHoliMathura – रंग भरनी एकादशी पर यहां हुआ भव्य आयोजन
LathmarHoliMathura – मथुरा की पवित्र धरती पर रंग भरनी एकादशी के अवसर पर प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन इस बार भी पूरे उल्लास और परंपरागत वैभव के साथ किया जाएगा। श्रीकृष्ण-जन्मभूमि परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और शुक्रवार शाम चार बजे से कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। आयोजन का आरंभ संत परंपरा के अनुरूप पूज्य गुरु शरणानंद महाराज के सान्निध्य में किया जाएगा।

जन्मभूमि परिसर में पारंपरिक होली की झलक
श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत ब्रज के पारंपरिक रसिया गायन और नृत्य से होगी। इसके बाद श्रद्धालु पुष्प होली के दर्शन करेंगे। ब्रज के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकार लठामार होली की सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे, जिसमें भाव, नृत्य और लोक परंपरा का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।
आयोजन को मंदिर की मर्यादा के अनुरूप रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। परिसर में अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस की व्यवस्था भी रहेगी।
प्राकृतिक रंगों से सजेगा उत्सव
संस्थान प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि इस बार टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाएगा। श्रद्धालु इन रंगों से ठाकुरजी को अर्पित कर होली का आनंद ले सकेंगे। रंग और गुलाल की वर्षा के लिए स्वचालित यंत्रों की व्यवस्था की गई है, ताकि बड़ी संख्या में उपस्थित भक्त सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से उत्सव का हिस्सा बन सकें।
सुरक्षा के मद्देनजर बाहर से रंग, गुलाल, पानी की बोतल या किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक सामान लाने पर रोक रहेगी। मंदिर परिसर में अनुचित आचरण करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
द्वारकाधीश मंदिर में कुंज होली
पुष्टिमार्ग परंपरा के प्रमुख केंद्र द्वारकाधीश मंदिर में भी रंग भरनी एकादशी पर विशेष आयोजन होगा। मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि राजाधिराज प्रभु कुंज में विराजमान होकर भक्तों संग होली खेलेंगे। प्रातः 10 से 11 बजे तक यह आयोजन होगा, जिसमें टेसू के रंगों से होली खेली जाएगी।
पुष्टिमार्ग में इस एकादशी को कुंज एकादशी भी कहा जाता है और इस दिन आराध्य देव के साथ होली खेलने की परंपरा का विशेष महत्व है। भक्तों से अपील की गई है कि वे अनुशासन बनाए रखते हुए दर्शन का लाभ लें।
गांव मरहला मुक्खा में पारंपरिक महोत्सव
ब्रज क्षेत्र के समीपवर्ती गांव मरहला मुक्खा में भी फाल्गुन सुदी एकादशी पर पारंपरिक होली महोत्सव आयोजित होगा। यहां नगाड़े, ढप, ढोल और मृदंग की थाप पर हुरियारे और हुरियारिनें सामूहिक नृत्य और गायन प्रस्तुत करेंगे। आसपास के अनेक गांवों से लोग इस उत्सव में भाग लेने पहुंचते हैं।
परंपरा के अनुसार ग्रामीण प्रातःकाल यमुना पूजन के बाद उत्सव की शुरुआत करते हैं। बरौठ, देदना, मकदमपुर, पालखेड़ा, सुहागपुर सहित कई गांवों के श्रद्धालु इसमें सम्मिलित होंगे। मेला 28 फरवरी से 1 मार्च प्रातः तक चलेगा।
रातभर जिकड़ी भजन प्रतियोगिता
आयोजन समिति के अनुसार शुक्रवार रात नौ बजे से अगले दिन सुबह नौ बजे तक जिकड़ी भजन प्रतियोगिता होगी। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के कलाकार इसमें भाग लेंगे। लोकधुनों और पारंपरिक भजनों की प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय बना रहेगा।
ब्रज में होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक है। प्रशासन और आयोजकों का प्रयास है कि यह आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो।



