MiddleEastConflict – लखनऊ में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा, ईरान प्रतिनिधि ने जताया आभार
MiddleEastConflict – लखनऊ में आयोजित एक शोक सभा के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. आयतुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारतीयों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का स्वेच्छा से श्रद्धांजलि देने पहुंचना भारत की सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को दर्शाता है। उन्होंने भारत को वफादारी, इंसानियत और नैतिकता की भूमि बताते हुए कहा कि यहां के लोगों ने दुख की इस घड़ी में गहरी एकजुटता दिखाई है।

श्रद्धांजलि सभा में दिखी व्यापक भागीदारी
डॉ. इलाही ने कहा कि दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई उन लोगों की आवाज थे, जिनकी अपनी आवाज नहीं थी। उन्होंने उन्हें अंतरात्मा की आवाज बताते हुए कहा कि लखनऊ में आयोजित इस सभा में शामिल लोग किसी दबाव में नहीं बल्कि अपनी इच्छा से पहुंचे थे। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि भारत में अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता दोनों मौजूद हैं।
ईरान की स्थिति पर दिया स्पष्ट संदेश
छोटे इमामबाड़े में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ. इलाही ने ईरान की मौजूदा स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश मौजूदा संघर्ष में मजबूती के साथ खड़ा है और किसी भी दबाव के आगे झुकने का सवाल नहीं उठता। उनके अनुसार यह संघर्ष ईरान पर थोपा गया है और देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है।
भारत-ईरान संबंधों पर जताई उम्मीद
इस मौके पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने डॉ. इलाही को एक ज्ञापन भी सौंपा। इसमें मांग की गई कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को निर्बाध आवाजाही की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं और मौजूदा वैश्विक हालात में ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना दोनों देशों के लिए अहम है। यह अपील उस समय की गई है जब समुद्री मार्गों पर तनाव के कारण ऊर्जा संकट की आशंकाएं बढ़ रही हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ा संघर्ष का दायरा
हालिया घटनाक्रम में पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में कई ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को एक व्यापक संघर्ष की ओर धकेल दिया है। भारत में भी इस घटनाक्रम के विरोध में कई जगह प्रदर्शन देखने को मिले हैं।
पुनर्निर्माण पर ईरान का जोर
इसी बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश के पुनर्निर्माण का आह्वान किया है। उन्होंने हालिया संघर्ष से प्रभावित बुनियादी ढांचे और पर्यावरण को बहाल करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू करने की बात कही। उनके अनुसार अब देश को विकास और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी हमलों ने देश के संसाधनों और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव डाला है।
अमेरिका की चेतावनी से बढ़ी चिंता
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने संकेत दिया है कि आने वाले समय में सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान से उत्पन्न खतरे को समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। इस बयान के बाद क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता और बढ़ गई है।
यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि एक ओर जहां कूटनीतिक और सामाजिक स्तर पर संवाद जारी है, वहीं दूसरी ओर सैन्य और राजनीतिक तनाव भी लगातार बना हुआ है। आने वाले समय में इन दोनों पहलुओं का संतुलन किस दिशा में जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा।



