RoadSafety – पूर्वांचल एक्सप्रेसवे हादसे के बाद बसों पर सख्ती
RoadSafety – पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हाल में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने परिवहन व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए दूसरे राज्यों से आने वाली यात्री बसों की विशेष जांच का निर्णय लिया है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां भी यात्री वाहन दुर्घटनाग्रस्त होगा, संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

दुर्घटनाग्रस्त बस में मानकों की अनदेखी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे का शिकार हुई बस की बॉडी निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं थी। आपातकालीन निकास द्वार के सामने सीट लगाई गई थी, जो स्पष्ट रूप से सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बदलाव आपात स्थिति में यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकते हैं। परिवहन विभाग ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी वाहन में इस तरह की अनियमितता पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
सभी राज्यों की बसों की होगी जांच
परिवहन आयुक्त ने कहा है कि अब प्रदेश की सीमाओं में प्रवेश करने वाली हर बस की गहन जांच की जाएगी। तय संख्या से अधिक यात्रियों को बैठाने, फिटनेस मानकों की अनदेखी या अन्य नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में ढिलाई पाई गई तो संबंधित अधिकारियों को दंडित किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
73 चालान के बावजूद चलती रही बस
हादसे में शामिल बस संख्या एचआर-55-एफ-1323 का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है। पिछले पांच वर्षों में इस बस का 73 बार चालान किया गया। इनमें से 43 चालान उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए। नियमों के अनुसार यदि किसी वाहन का पांच या उससे अधिक बार चालान होता है तो उसके पंजीकरण और चालक के लाइसेंस पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके बावजूद न तो वाहन का पंजीकरण निलंबित किया गया और न ही चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर रोक लगी।
प्रदेश के विभिन्न शहरों में कार्रवाई
लखनऊ आरटीओ क्षेत्र में ही इस बस के खिलाफ 27 चालान दर्ज हुए। शहीद पथ, ट्रांसपोर्ट नगर, गोसाईगंज, किसान पथ, रायबरेली रोड और सरोजनी नगर जैसे स्थानों पर उल्लंघन दर्ज किए गए थे। इसके अलावा गोरखपुर, गाजियाबाद, सहारनपुर, आजमगढ़, नोएडा, आगरा, कानपुर और अयोध्या में भी चालान काटे गए। इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा, जो निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अन्य राज्यों में भी उल्लंघन
यह बस हरियाणा के गुरुग्राम आरटीओ में 14 मार्च 2019 को पंजीकृत हुई थी। तब से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और बिहार में भी इसके खिलाफ कार्रवाई हुई। जानकारी के अनुसार कुल 17,62,148 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 50 चालानों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि शेष मामले लंबित हैं। बिहार के सुपौल में एक बार में 2,29,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जो सबसे अधिक था।
जवाबदेही तय करने की तैयारी
परिवहन विभाग ने संकेत दिए हैं कि अब नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। जिन मामलों में बार-बार उल्लंघन सामने आए हैं, उनकी अलग से समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एक्सप्रेसवे और राजमार्गों पर यात्री वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभाग का मानना है कि सख्त निगरानी और नियमित जांच से ही दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।



