उत्तर प्रदेश

Tuberculosis – शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज में टीबी मरीज की दुखद मौत

Tuberculosis – मंगलवार देर रात शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे एक युवा टीबी मरीज की ऊंचाई से गिरकर मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन और पुलिस के अनुसार, यह घटना अचानक हुई और पूरे परिसर में अफरातफरी मच गई। मृतक की पहचान सीतापुर जिले के मोहरनिया निवासी 25 वर्षीय अनुज कुमार के रूप में हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि वह कई महीनों से गंभीर क्षय रोग से पीड़ित था और हाल ही में उसकी हालत बिगड़ने पर यहां भर्ती कराया गया था। यह घटना अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

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Tuberculosis – शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज में टीबी मरीज की

लंबी बीमारी और थकाऊ इलाज का सफर

परिवार के सदस्यों ने बताया कि अनुज का इलाज पहले लखनऊ के एक बड़े अस्पताल में शुरू हुआ था, जहां शुरुआती जांच और दवाइयां दी गईं। इसके बाद सीतापुर में करीब छह महीने तक टीबी का नियमित कोर्स चला, लेकिन उम्मीद के मुताबिक सुधार नहीं दिखा। लगातार कमजोरी, खांसी और सांस की दिक्कतें बढ़ती गईं। जब हालत ज्यादा गंभीर हो गई, तो 22 जनवरी को उसे शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां उसे टीबी वार्ड में रखा गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा था। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी और उसे लगातार चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत थी।

पारिवारिक हालात और मानसिक दबाव

अनुज के परिवार के लिए यह दौर बेहद कठिन था। उसकी पत्नी रूबी भी पहले इसी बीमारी से ग्रस्त रही थी, हालांकि इलाज के बाद उसकी तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा था। दंपति की दो साल की बेटी सोना है, जिसकी जिम्मेदारी भी अनुज पर थी। रिश्तेदारों ने बताया कि लंबे इलाज, आर्थिक बोझ और बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने से अनुज मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। वह कई बार अपनी बीमारी और भविष्य को लेकर चिंता जताता था। डॉक्टरों के मुताबिक, टीबी के लंबे उपचार के दौरान मरीजों में अवसाद और निराशा के लक्षण देखे जाते हैं, जिसके लिए काउंसलिंग और मानसिक सहारे की जरूरत पड़ती है।

रात के घटनाक्रम की जानकारी

घटना वाले दिन रात करीब साढ़े 11 बजे अनुज अपने वार्ड में लेटा हुआ था। उसकी मां राधा ने उसे नियमित दवा दी थी और कुछ देर बाद वह बाहर चली गईं। इसी बीच, अनुज वार्ड से निकलकर अस्पताल की तीसरी मंजिल तक पहुंच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही मिनटों बाद तेज आवाज सुनाई दी। जब लोग वहां पहुंचे, तो वह नीचे गिरा पड़ा था। अस्पताल कर्मियों ने तुरंत उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद मरीजों और उनके परिजनों में डर और बेचैनी फैल गई।

पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई

सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज चौकी की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अस्पताल स्टाफ से पूछताछ की। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। चौक कोतवाली प्रभारी अश्विनी सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि अनुज लंबे समय से बीमारी से जूझ रहा था और इससे परेशान था। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। साथ ही, अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों की निगरानी को लेकर भी समीक्षा की जा रही है।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य और अस्पतालों में उनकी सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए इलाज के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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