UP Cow Shelter Diet Plan: बेजुबानों की थाली पर भ्रष्टाचार का पहरा खत्म, यूपी सरकार के इस फैसले से अब भूखा नहीं सोएगा गोवंश
UP Cow Shelter Diet Plan: उत्तर प्रदेश की सड़कों और खेतों में घूमने वाले लाखों निराश्रित गोवंश के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद मानवीय और सुव्यवस्थित पहल की है। प्रदेश के हजारों गोआश्रय स्थलों में रहने वाले पशुओं को अब भरपेट और पौष्टिक भोजन मिल सके, इसके लिए (Animal Welfare Policy) के तहत आहार की मात्रा और बजट को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने की तैयारी कर ली गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बजट का एक-एक पैसा सीधे इन बेजुबानों के पेट तक पहुंचे और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाए।

7500 से अधिक आश्रय स्थलों में बदलेगी व्यवस्था
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के भीतर लगभग 7560 अस्थायी और स्थायी गोआश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं, जहां करीब 12.36 लाख गोवंश संरक्षित हैं। इन सभी केंद्रों पर (Livestock Management System) को प्रभावी बनाने के लिए अब आहार का एक समान स्तर तय किया गया है। इससे पहले अलग-अलग जिलों में चारे और भूसे की खरीद की दरें अलग होने के कारण न केवल प्रशासनिक असुविधा होती थी, बल्कि बजट के बंदरबांट की संभावनाएं भी बनी रहती थीं, जिसे अब सख्ती से खत्म किया जा रहा है।
50 रुपये की सीमा में मिलेगा संतुलित पोषण
पशुधन विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्येक गोवंश के भरण-पोषण के लिए निर्धारित 50 रुपये की दैनिक राशि का उपयोग अब वैज्ञानिक तरीके से होगा। इस बजट के भीतर (Nutritional Diet Chart) को इस तरह तैयार किया गया है कि पशु को तीन किलो सूखा चारा यानी भूसा, पांच किलो हरा चारा और करीब 500 ग्राम विशेष पशु आहार उपलब्ध कराया जाएगा। इस संतुलित आहार से न केवल गोवंश का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि उनके संरक्षण की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
चारे और साइलेज की दरें हुई फिक्स
अक्सर देखा गया है कि बाजार में चारे की कीमतों में उतार-चढ़ाव का बहाना बनाकर अधिकारी और ठेकेदार सरकारी खजाने को चूना लगाते थे। अब विभाग ने (Feed Procurement Rates) को तय कर दिया है, जिसमें भूसा सात से आठ रुपये प्रति किलो और हरा चारा ढाई से तीन रुपये की दर पर लिया जाएगा। इसके अलावा पशु आहार के लिए 22 रुपये प्रति किलो की दर निर्धारित की गई है, ताकि पूरे प्रदेश में एक जैसी व्यवस्था लागू रहे और कहीं भी किसी प्रकार की विसंगति की गुंजाइश न बचे।
लैब में होगी आहार की गुणवत्ता की अग्निपरीक्षा
सिर्फ खाना खिला देना ही काफी नहीं है, बल्कि वह खाना गोवंश के स्वास्थ्य के लिए कितना सही है, इसकी भी अब नियमित जांच होगी। आपूर्ति किए जाने वाले साइलेज और हरे चारे की (Quality Control Testing) समय-समय पर विभागीय प्रयोगशालाओं या कृषि विश्वविद्यालयों की न्यूट्रिशन लैब में कराई जाएगी। यदि आहार की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, तो संबंधित जिला प्रशासन और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिससे बेजुबानों को घटिया खाना देने वालों में डर बना रहे।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाली खरीद पर लगेगी लगाम
बीते कुछ समय में गौतमबुद्धनगर से लेकर झांसी और आजमगढ़ तक कई जिलों में पशु आहार की खरीद में कीमतों के भारी अंतर की शिकायतें मिली थीं। इन (Corruption Prevention Measures) को मजबूती से लागू करने के लिए ही सरकार ने अब केंद्रीकृत व्यवस्था अपनाई है। पहले अलग-अलग जिलों में एक ही वस्तु की कीमत में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता था, जिसे अब सरकार ने दरों को सीमित कर और आहार की मात्रा तय कर पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया है।
समय सीमा के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने के लिए सरकार ने अभी से वित्तीय वर्ष 2026-27 की तैयारी शुरू कर दी है। सभी जिलों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि भूसा, साइलेज और अन्य (Government Tendering Process) की कार्यवाही हर हाल में 31 मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाए। समय पर टेंडर होने से यह लाभ होगा कि चारे की कमी के कारण कभी भी गोवंश को भूखा नहीं रहना पड़ेगा और भंडारण की व्यवस्था भी सुचारू रूप से चलती रहेगी।
बेसहारा पशुओं के प्रति संवेदनशीलता की मिसाल
यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि उन लाखों गायों के प्रति एक संवेदनशील नजरिया है जो सड़कों पर बदहाली का जीवन जीने को मजबूर थीं। (Stray Cattle Conservation) के इस नए मॉडल से यूपी सरकार अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल पेश कर रही है। अब कान्हा गो आश्रय स्थलों से लेकर ग्रामीण इलाकों के केंद्रों तक, हर गाय को समान मात्रा में दाना-पानी मिलेगा, जो उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।



