उत्तर प्रदेश

UPBoardResult – कॉपियों की जांच शुरू, अप्रैल अंत तक परिणाम की तैयारी

UPBoardResult – उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बुधवार, 18 मार्च से राज्यभर के लगभग 250 केंद्रों पर शुरू हो गया। इस बड़े स्तर की प्रक्रिया में करीब 2.5 करोड़ कॉपियों की जांच की जानी है, जिसके लिए डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों और परीक्षकों को लगाया गया है। बोर्ड ने इस बार मूल्यांकन को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए कई नए प्रावधान लागू किए हैं, जिससे परिणाम की विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

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मूल्यांकन में बड़ी संख्या में शिक्षकों की तैनाती

हाईस्कूल की कॉपियों की जांच के लिए हजारों की संख्या में अंकेक्षक, डिप्टी हेड एग्जामिनर और परीक्षक नियुक्त किए गए हैं। इसी तरह इंटरमीडिएट स्तर पर भी बड़ी टीम बनाई गई है, ताकि निर्धारित समय में कार्य पूरा किया जा सके। इस बार पहली बार राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ शिक्षकों को भी अंकेक्षण कार्य में शामिल किया गया है, जिससे जांच प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही न रहे।

त्रिस्तरीय जांच व्यवस्था पर विशेष जोर

बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए तीन स्तर की व्यवस्था लागू की है। सबसे पहले परीक्षक कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे, इसके बाद डिप्टी हेड एग्जामिनर चयनित कॉपियों की दोबारा जांच करेंगे। तीसरे चरण में अंकेक्षक कुल कॉपियों में से लगभग 15 प्रतिशत का पुनः परीक्षण करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर गलती की गुंजाइश न रहे और छात्रों को उनके प्रदर्शन के अनुसार सही अंक मिलें।

अंकेक्षकों की नियुक्ति में इस बार बदलाव

पिछले वर्षों में अंकेक्षकों की नियुक्ति को लेकर कई शिकायतें सामने आई थीं, जिसमें अनुभवहीन शिक्षकों को जिम्मेदारी देने की बात कही गई थी। इस बार बोर्ड ने खुद सॉफ्टवेयर के माध्यम से करीब 6980 अंकेक्षकों का चयन किया है। इनमें अनुभवी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और वरिष्ठ शिक्षक शामिल हैं, जो तय मानकों के अनुसार कॉपियों की जांच करेंगे और रिपोर्ट तैयार करेंगे।

समयसीमा तय, अप्रैल में परिणाम की संभावना

बोर्ड ने निर्देश दिया है कि मूल्यांकन कार्य 31 मार्च तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। इसके बाद परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी और संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर निगरानी बढ़ाई गई है और अधिकारियों को नियमित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

अंक दर्ज करने में सख्ती, गलती पर कार्रवाई संभव

इस बार बोर्ड ने अंक दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। शिक्षकों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अंक भरते समय किसी भी प्रकार की कटिंग या ओवरराइटिंग न हो, क्योंकि कंप्यूटर सिस्टम ऐसी प्रविष्टियों को स्वीकार नहीं करेगा। पहले ऐसे मामलों में अंक अपलोड करने में गड़बड़ी सामने आई थी, जिसके चलते कई छात्रों को पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना पड़ा था।

लापरवाही पर सख्त कदम की चेतावनी

मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बोर्ड ने यह भी तय किया है कि रैंडम तरीके से कॉपियों की दोबारा जांच की जाएगी। यदि इसमें किसी तरह की त्रुटि पाई जाती है, तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 के तहत दंडात्मक प्रावधान भी शामिल हैं।

प्रधानाचार्यों की ड्यूटी को लेकर असंतोष

मूल्यांकन कार्य में प्रधानाचार्यों को अंकेक्षण की जिम्मेदारी दिए जाने पर कुछ शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह कार्य उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। इस संबंध में राज्य सरकार को ज्ञापन भेजकर पुनर्विचार की मांग भी की गई है। हालांकि बोर्ड का कहना है कि यह कदम मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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