उत्तर प्रदेश

UPSecurityUpdate – पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा पर सरकार का जवाब

UPSecurityUpdate – उत्तर प्रदेश विधान परिषद में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। समाजवादी पार्टी की ओर से सुरक्षा में कथित कमी का सवाल उठाए जाने के बाद सरकार ने विस्तृत आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सुरक्षा में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है, बल्कि कई मामलों में स्वीकृत संख्या से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

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प्रश्नकाल के दौरान सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा ने यह जानना चाहा कि क्या सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों को NSG सुरक्षा देने पर विचार कर रही है। इसके जवाब में मौर्य ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपनी ओर से उच्च श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करा रही है और किसी भी प्रकार की लापरवाही का सवाल नहीं उठता।

अखिलेश यादव की सुरक्षा व्यवस्था

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। उनके लिए कुल 186 सुरक्षाकर्मियों की स्वीकृति है, जिनमें से 185 वर्तमान में तैनात हैं। मौर्य ने कहा कि यह संख्या प्रदेश के अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों की तुलना में सबसे अधिक है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि सुरक्षा व्यवस्था समय-समय पर समीक्षा के आधार पर तय की जाती है और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त बल उपलब्ध कराया जाता है।

मायावती के लिए अतिरिक्त प्रावधान

बसपा प्रमुख मायावती को पहले से NSG सुरक्षा प्राप्त है। उनके लिए 156 सुरक्षाकर्मियों की स्वीकृति है, लेकिन फिलहाल 161 कर्मी तैनात हैं। नेता सदन ने इसे सरकार की सतर्कता का उदाहरण बताते हुए कहा कि स्वीकृत संख्या से अधिक बल उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकता है।

राजनाथ सिंह से तुलना

मौर्य ने तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि रक्षा मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के लिए 81 सुरक्षाकर्मी स्वीकृत हैं और वर्तमान में 82 तैनात हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज करते हुए कहा कि जब कुछ नेताओं के पास इससे कहीं अधिक सुरक्षाकर्मी मौजूद हैं, तब सुरक्षा में कमी का आरोप तथ्यात्मक आधार पर टिकता नहीं है।

NSG सुरक्षा पर स्थिति स्पष्ट

NSG सुरक्षा की मांग पर सरकार ने साफ किया कि यह निर्णय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। राज्य सरकार Z+ स्तर की सुरक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभा रही है।

मौर्य ने सदन को आश्वस्त किया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने में कोई समझौता नहीं किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण खतरे के आकलन और एजेंसियों की सिफारिशों के आधार पर किया जाता है।

विधान परिषद में हुई इस चर्चा के बाद सरकार ने संकेत दिया कि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रंग देने के बजाय तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

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