उत्तराखण्ड

CBI Inquiry for Ankita Bhandari Case: सीएम धामी के एक फैसले ने पलट दी उत्तराखंड की पूरी राजनीतिक बाजी…

CBI Inquiry for Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के इतिहास का वह घाव है जो समय बीतने के साथ और गहरा होता जा रहा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करके न केवल अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। यह फैसला (public sentiment priority) को सर्वोपरि रखने की धामी की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में उनकी छवि को ‘कठोर और निर्णायक’ नेता के रूप में स्थापित किया है।

CBI Inquiry for Ankita Bhandari Case
CBI Inquiry for Ankita Bhandari Case
WhatsApp Group Join Now

विपक्ष के तरकश से छीना सबसे बड़ा तीर

उत्तराखंड की राजनीति में अंकिता भंडारी केस विपक्षी दलों के लिए सरकार को घेरने का सबसे बड़ा हथियार बना हुआ था। बार-बार ‘वीआईपी’ का नाम उछलना और एसआईटी जांच पर सवाल उठना भाजपा के लिए गले की फांस बन गया था। धामी ने (CBI investigation recommendation) का दांव खेलकर एक झटके में विपक्ष के हाथों से यह मुद्दा छीन लिया है। अब कांग्रेस और अन्य दल इस बात पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं हैं कि सरकार जांच से भाग रही है, क्योंकि अब गेंद केंद्र की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के पाले में है।

युवाओं के भरोसे को फिर से बहाल करने की कोशिश

यह पहली बार नहीं है जब धामी ने किसी बड़े विवाद में सीबीआई का सहारा लिया हो। इससे पहले यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में भी (youth movement impact) को भांपते हुए उन्होंने तुरंत जांच की मंजूरी दी थी। उस दौरान युवाओं का गुस्सा शांत करने के लिए मुख्यमंत्री खुद परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पहुंच गए थे। ऐसा साहस उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में एनडी तिवारी और हरीश रावत जैसे कद्दावर नेताओं के अलावा केवल धामी ने ही दिखाया है, जिससे युवाओं के बीच उनकी साख बढ़ी है।

रिसॉर्ट पर बुलडोजर और ‘वीआईपी’ का रहस्य

अंकिता हत्याकांड में शुरू से ही दो बातें भाजपा संगठन के लिए मुसीबत बनी हुई थीं। पहली, आरोपियों के रिसॉर्ट पर आनन-फानन में बुलडोजर चलाना जिसे साक्ष्य मिटाने की कोशिश के तौर पर देखा गया। दूसरी, वह (mysterious VIP name) जिसका जिक्र अंकिता के चैट्स में था। हालांकि 30 मई 2025 को आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, लेकिन जनता के मन में यह सवाल आज भी जिंदा था कि ‘पर्दे के पीछे का असली खिलाड़ी’ कौन है। सीबीआई जांच अब इसी रहस्य से पर्दा उठाने का काम करेगी।

‘एक्शन मोड’ वाले मुख्यमंत्री की नई परिभाषा

जुलाई 2021 में सत्ता संभालने के बाद से धामी ने खुद को एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया है जो किसी मुद्दे के तूल पकड़ने का इंतजार नहीं करते। (strict anti copying law) लागू करना हो या भू-कानून पर बाहरी खरीदारों पर नकेल कसना, धामी ने विपक्ष के हमलावर होने से पहले ही अपना फैसला सुना दिया। हरिद्वार जमीन घोटाला और केदारनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश जैसे संवेदनशील मामलों में भी उनकी त्वरित कार्रवाई ने उन्हें एक ‘प्रो-एक्टिव’ मुख्यमंत्री की पहचान दिलाई है।

वायरल कॉल रिकॉर्ड और भाजपा की असहजता

हाल के दिनों में पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसने भाजपा संगठन की नींद उड़ा दी थी। इस कॉल रिकॉर्ड में (political controversy audio leak) के चलते भाजपा के एक कद्दावर नेता का नाम वीआईपी के रूप में प्रचारित होने लगा। इससे पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका थी। धामी ने अफसरों से विधिक रिपोर्ट मिलते ही बिना पल भर की देरी किए सीबीआई जांच की सिफारिश कर भाजपा संगठन को एक बड़ी राहत दी है।

विधिक पहलुओं के अध्ययन के बाद बड़ा प्रहार

जैसे ही विधिक जानकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी, धामी ने तुरंत फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए। उनके इस (legal study and decision) के पीछे की मंशा साफ थी कि वे इस मामले को 2026 के विधानसभा चुनावों या किसी अन्य राजनीतिक आंदोलन का केंद्र नहीं बनने देना चाहते थे। भाजपा अब सीना तानकर जनता के बीच जा सकती है कि उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए सर्वोच्च संस्था का द्वार खोल दिया है, जिससे पार्टी की अंतर्कलह भी शांत होने की उम्मीद है।

अंकिता के नाम से जुड़ेगा नर्सिंग कॉलेज

न्याय की लड़ाई के साथ-साथ धामी सरकार ने अंकिता की स्मृति को संजोने के लिए भी कदम उठाए हैं। श्रीकोट राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नाम अब (Ankita Bhandari Nursing College) के नाम पर रखा जाएगा। यह कदम अंकिता के परिवार और जनता की भावनाओं को मरहम लगाने की कोशिश है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अंकिता केवल एक बेटी नहीं थी, बल्कि वह राज्य के स्वाभिमान की प्रतीक बन चुकी है जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

उत्तराखंड में नकल माफिया और सख्त कानून

धामी के कार्यकाल की एक बड़ी उपलब्धि नकल माफियाओं पर नकेल कसना रही है। जब प्रदेश की (government job recruitment crisis) सड़कों पर प्रदर्शनों का कारण बन रही थी, तब धामी ने एसटीएफ को खुली छूट दी और देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाया। इस कानून के तहत उम्रकैद और करोड़ों के जुर्माने का प्रावधान है। अंकिता केस में भी इसी तरह की कठोरता दिखाकर वे यह साबित करना चाहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, वह बच नहीं पाएगा।

न्याय की उम्मीद और धामी का दांव

अंकिता भंडारी केस की सीबीआई जांच का फैसला उत्तराखंड की राजनीति में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह (political strategy of Dhami) का वह हिस्सा है जिसने एक ही तीर से कई शिकार किए हैं। अब जनता की निगाहें सीबीआई पर टिकी हैं कि क्या वह उस ‘वीआईपी’ का चेहरा बेनकाब कर पाएगी या यह केवल एक राजनीतिक दांव बनकर रह जाएगा। बहरहाल, धामी ने फिलहाल अपनी सरकार पर लगे दागों को धोने और जनता का भरोसा जीतने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा दिया है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.