CharDhamYatra – बदरीनाथ धाम के कपाट खुले, श्रद्धालुओं को मिला दर्शन करने का मौका…
CharDhamYatra – हिमालय की गोद में बसे भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट गुरुवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर मंदिर के द्वार खुलते ही बड़ी संख्या में मौजूद भक्तों ने बद्री विशाल के दर्शन किए। इसके साथ ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई, जिसका इंतजार हर साल देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु करते हैं।

चारधाम यात्रा की शुरुआत का क्रम
इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत पहले ही चरण में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 18 अप्रैल को खुलने के साथ हो चुकी थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के द्वार खोले गए। अब बदरीनाथ धाम के खुलने के साथ यात्रा पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चारों धामों के दर्शन को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उत्साह
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरा परिसर ‘जय बद्री विशाल’ के जयकारों से गूंज उठा। इस खास मौके पर भारतीय सेना के बैंड ने भी अपनी प्रस्तुति से माहौल को और भक्ति भाव से भर दिया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो इस यात्रा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती हैं।
तुंगनाथ धाम के कपाट भी खुले
चारधाम यात्रा के साथ-साथ अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट भी एक दिन पहले श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद सुबह 11 बजे मंदिर के द्वार खोले गए। चोपता से भगवान की डोली पारंपरिक रीति से तुंगनाथ पहुंची, जहां परिक्रमा के बाद कपाट खोले गए। पहले ही दिन करीब 800 श्रद्धालुओं ने यहां दर्शन किए।
पर्यावरण संरक्षण पर सरकार का जोर
चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए राज्य सरकार ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीमांत गांव माणा के दौरे के दौरान लोगों से यात्रा को प्लास्टिक मुक्त बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि तीर्थ स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण जरूरी है और इसमें स्थानीय लोगों व श्रद्धालुओं की भूमिका अहम है।
सीमांत गांवों के विकास पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान माणा गांव में ग्रामीणों से संवाद भी किया। उन्होंने ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन पहलों से गांवों में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है। साथ ही केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और पर्यटन से जुड़ने के अवसर मिल रहे हैं।
यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां
चारधाम यात्रा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके।
चारधाम यात्रा के शुरू होते ही उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिल गई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।