उत्तराखण्ड

FoodSafety – उत्तराखंड में तीन साल में 523 खाद्य सैंपल फेल, तेज हुई कार्रवाई

FoodSafety – उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य में पिछले तीन वर्षों के दौरान जांच के लिए लिए गए हजारों खाद्य नमूनों में से सैकड़ों सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतर पाए। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार कुल 4909 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 523 नमूने अधोमानक पाए गए। इन मामलों में संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

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यह जानकारी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी। उन्होंने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए राज्य सरकार लगातार निगरानी और सैंपलिंग की प्रक्रिया को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

विधानसभा में उठाया गया खाद्य मिलावट का मुद्दा

विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला ने खाद्य पदार्थों की जांच और मिलावट के मामलों को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि विभाग में कर्मचारियों की कमी होने के बावजूद खाद्य मिलावट के खिलाफ कार्रवाई किस तरह की जा रही है।

इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार नियमित रूप से बाजारों और दुकानों से खाद्य नमूने लेकर उनकी जांच करवा रही है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार अभियान चला रहा है।

तीन वर्षों के आंकड़ों में सामने आई स्थिति

सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में कुल 1627 खाद्य नमूनों की जांच कराई गई थी। इनमें से 170 नमूने मिसब्रांड या असुरक्षित पाए गए।

इसके बाद वर्ष 2024-25 में 1684 सैंपल लिए गए, जिनमें से 159 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर पाए।

वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 1598 खाद्य नमूनों की जांच की जा चुकी है। इनमें से 194 नमूने अधोमानक पाए गए हैं।

इन तीन वर्षों के कुल आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो 4909 नमूनों की जांच में 523 मामलों में गड़बड़ी सामने आई है। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार इन सभी मामलों में अदालत में मुकदमे दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की गई है।

देहरादून में तैयार हुआ नया फूड टेस्टिंग लैब

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि खाद्य पदार्थों की जांच को और मजबूत बनाने के लिए देहरादून में एक आधुनिक फूड टेस्टिंग लैब तैयार की गई है।

उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशाला इसी महीने से काम करना शुरू कर देगी। इसके चालू होने से खाद्य नमूनों की जांच प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी।

सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर जांच सुविधाएं उपलब्ध होने से मिलावट के मामलों पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।

हाट-बाजार और मेलों में भी होगी नियमित जांच

विधानसभा में चर्चा के दौरान भाजपा विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने सुझाव दिया कि खाद्य पदार्थों की जांच केवल त्योहारों के समय ही नहीं, बल्कि हाट-बाजार और मेलों में भी नियमित रूप से की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग भोजन करते हैं, इसलिए यहां भी खाद्य सुरक्षा की निगरानी जरूरी है।

इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि अब राज्य में हाट-बाजार, मेलों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में भी खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग कराई जाएगी। इसके लिए पूरे राज्य में अभियान चलाया जाएगा।

विभाग में कर्मचारियों की कमी

चर्चा के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि विभाग में निरीक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं है। मंत्री ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग में 28 निरीक्षक पद खाली हैं।

इन पदों को भरने के लिए लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा गया है। जब तक नई नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक विभाग प्रतिनियुक्ति के माध्यम से कर्मचारियों की कमी को पूरा करने का प्रयास कर रहा है।

निकायों को जिम्मेदारी देने का सुझाव

विधानसभा में कुछ विधायकों ने यह सुझाव भी दिया कि खाद्य सैंपलिंग की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को दी जा सकती है।

विधायक विनोद चमोली और मुन्ना सिंह चौहान ने इस प्रस्ताव को रखते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने से मिलावट के मामलों पर जल्दी नियंत्रण पाया जा सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और इसकी व्यवहारिकता का परीक्षण किया जाएगा।

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