LandProbe – धौलास में 20 एकड़ जमीन आवंटन पर उच्च स्तरीय जांच
LandProbe – उत्तराखंड सरकार ने देहरादून के धौलास गांव में शिक्षा के उद्देश्य से आवंटित 20 एकड़ जमीन की बिक्री को लेकर उठे सवालों पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आवंटन की शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो राज्य सरकार जमीन को वापस अपने नियंत्रण में लेगी। यह जमीन करीब दो दशक पहले एक ट्रस्ट को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के लिए दी गई थी।

संयुक्त जांच टीम का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने अतिरिक्त जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा की अगुवाई में एक संयुक्त टीम बनाई है। इस टीम में राजस्व, वन और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम ने धौलास और विकासनगर क्षेत्र में संबंधित भूमि की पैमाइश और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जमीन की मौजूदा स्थिति और पूर्व शर्तों के अनुपालन की विस्तार से समीक्षा की जा रही है।
शर्तों के पालन की पड़ताल
जांच टीम के प्रमुख केके मिश्रा ने बताया कि भूमि आवंटन के समय स्पष्ट शर्त थी कि इसका उपयोग शैक्षणिक उद्देश्य से होगा और भूमि का दर्जा कृषि ही बना रहेगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जमीन को बड़े भूखंडों में 15 लोगों को बेचा गया। बाद में इन खरीदारों ने इसे छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर 70 से अधिक लोगों को बेच दिया। अब प्रशासन यह देख रहा है कि क्या यह प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
प्रशासन का कहना है कि विस्तृत माप रिपोर्ट मिलने के बाद जमींदारी उन्मूलन अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। यदि आवंटन की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो भूमि हस्तांतरण को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच पूरी तरह दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
एमडीडीए की कार्रवाई
इस बीच मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने भी कथित अनधिकृत प्लॉटिंग पर कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने बिना स्वीकृत नक्शे के बनाई गई बाउंड्री वॉल और आंतरिक सड़कों को ध्वस्त कर दिया। साथ ही क्षेत्र में नोटिस बोर्ड लगाकर लोगों को अवैध प्लॉट में निवेश से सावधान रहने की चेतावनी दी गई है। प्राधिकरण ने संभावित खरीदारों से किसी भी प्रकार की खरीद से पहले प्राधिकरण से सत्यापन कराने की अपील की है।
राजनीतिक बयानबाजी और सुरक्षा का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आवंटन वर्ष 2004 में हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन के पीछे कुछ विशेष उद्देश्य थे, जिनकी भी जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए बयान में उन्होंने कहा कि राज्य की भूमि का उपयोग नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। वहीं भाजपा विधायक विनोद चमोली ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर आवंटन निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी की निकटता का हवाला देते हुए सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी उठाया।
फिलहाल जांच जारी है और प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।



