उत्तराखण्ड

Haridwar child road accident tragedy: पापा की एक चूक ने उजाड़ दिया हंसता-खेलता परिवार, गाड़ी बैक करते वक्त हुआ बड़ा हादसा

Haridwar child road accident tragedy: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी है जिसने पूरे इलाके की आंखों को नम कर दिया है। झबरेड़ा क्षेत्र में एक मासूम बच्ची की जान उसके अपने ही पिता के वाहन की चपेट में आने से चली गई। यह हादसा (Accidental death of a child) का एक ऐसा उदाहरण है जो किसी भी माता-पिता के कलेजे को चीर कर रख दे। सोमवार की शाम तक जिस घर में बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और रोने की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

Haridwar child road accident tragedy
Haridwar child road accident tragedy

पिता की आवाज सुनकर प्यार से दौड़ी थी नीलम

मिली जानकारी के अनुसार, झबरेड़ा निवासी रवि कुमार पेशे से एक लोडिंग वाहन चालक हैं और मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी दो नन्ही बेटियां थीं, जिनमें से तीन वर्षीय नीलम सबसे छोटी और सबकी लाडली थी। सोमवार की शाम करीब आठ बजे जब रवि अपना काम खत्म कर घर लौटे, तो (Parental homecoming excitement) के कारण नीलम अपने पापा से मिलने के लिए बेताब हो गई। उसे क्या पता था कि जिस पिता की आवाज सुनकर वह खुशी-खुशी बाहर भाग रही है, वही लम्हा उसकी जिंदगी का आखिरी लम्हा साबित होगा।

लोडिंग वाहन को बैक करते समय हुआ बड़ा हादसा

हादसा उस वक्त हुआ जब रवि अपने घर के आंगन में गाड़ी पार्क करने की कोशिश कर रहे थे। गाड़ी के इंजन की आवाज और पिता को वापस आया देख नीलम दौड़ती हुई वाहन के पिछले हिस्से की तरफ पहुंच गई। रवि को इस बात का जरा भी (Blind spots in heavy vehicles) का अंदाजा नहीं था कि उनकी लाडली बिल्कुल पहिए के पास खड़ी है। उन्होंने जैसे ही गाड़ी को पीछे की तरफ मोड़ा, मासूम नीलम भारी पहिए के नीचे दब गई।

एक चीख और फिर सब कुछ खत्म हो गया

जैसे ही गाड़ी बच्ची के ऊपर से गुजरी, उसकी एक दर्दनाक चीख निकली जिसे सुनकर रवि और घर के अन्य सदस्य बदहवास होकर बाहर की तरफ भागे। वहां का (Traumatic scene at the accident site) देखकर रवि के होश उड़ गए। उनकी अपनी आंखों के सामने उनकी छोटी बेटी खून से लथपथ पड़ी थी। आनन-फानन में परिवार वाले बिना समय गंवाए बच्ची को लेकर नजदीकी अस्पताल की ओर दौड़े, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गई सांसें

परिजन बच्ची को लेकर जब तक डॉक्टरों के पास पहुंचे, तब तक नीलम की सांसें थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद (Grief stricken family members) का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सबसे ज्यादा सदमे में पिता रवि कुमार हैं, जिन्हें इस बात का मलाल ताउम्र रहेगा कि उनके अपने हाथ से उनकी बेटी की जान चली गई। अस्पताल के गलियारे पिता की चीखों से गूंज उठे और वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।

पुलिस ने शुरू की हादसे की औपचारिक जांच

इस दुखद हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और परिवार के सदस्यों से (Police inquiry into fatal accidents) के तहत पूरी जानकारी ली। हालांकि, यह पूरी तरह से एक घरेलू दुर्घटना थी, जिसमें किसी का कोई आपराधिक इरादा नहीं था, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं के तहत पुलिस ने अपनी रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

गमगीन माहौल में दी गई मासूम को अंतिम विदाई

हादसे के बाद पूरे झबरेड़ा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई रवि के परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहा है। मंगलवार को बेहद गमगीन माहौल में तीन वर्षीय (Final rites of the toddler) की प्रक्रिया पूरी की गई। गांव के लोगों का कहना है कि नीलम बहुत ही चंचल और प्यारी बच्ची थी, जिसका इस तरह जाना पूरे समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। इस घटना ने एक बार फिर घर के अंदर वाहन पार्किंग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वाहन चालकों के लिए एक सबक और चेतावनी

यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अपने घरों में बड़े वाहन पार्क करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि (Child safety around vehicles at home) को लेकर हमें बहुत अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। गाड़ी बैक करते समय अक्सर छोटे बच्चे नजर नहीं आते, जो इस तरह के जानलेवा हादसों का कारण बनते हैं। रवि कुमार के परिवार पर टूटा यह दुखों का पहाड़ हमें सिखाता है कि छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है।

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