RispanaEncroachment – काठ बंगला के 116 परिवारों को तीन दिन में शिफ्टिंग निर्देश
RispanaEncroachment – देहरादून में रिस्पना नदी किनारे बसे काठ बंगला क्षेत्र के 116 परिवारों को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने तीन दिन के भीतर वैकल्पिक आवास में स्थानांतरित होने का नोटिस जारी किया है। नोटिस रविवार को चस्पा किए गए, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि संबंधित परिवारों को बुधवार तक नगर निगम द्वारा निर्मित फ्लैटों में शिफ्ट होना होगा। आदेश में यह भी उल्लेख है कि तय समय सीमा के बाद क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नोटिस के बाद कॉलोनी में असमंजस और चिंता का माहौल है।

एनजीटी के निर्देशों का हवाला
प्राधिकरण की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुसार नदी के बाढ़ क्षेत्र में बने अवैध ढांचों को हटाया जाना आवश्यक है। इसी क्रम में एमडीडीए, नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त बैठक के बाद पात्र परिवारों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आवास योजना के तहत फ्लैट आवंटित किए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पर्यावरणीय संतुलन और नदी क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।
वैकल्पिक फ्लैट तैयार होने का दावा
नगर निगम की ओर से बताया गया है कि आवंटित फ्लैटों में बिजली, पानी और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। नगर आयुक्त नमामी बंसल ने कहा कि कुछ तकनीकी कारणों से शिफ्टिंग में देरी हुई थी, लेकिन अब जल संस्थान से जुड़े मुद्दे सुलझा लिए गए हैं।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने भी स्पष्ट किया कि यह पहला नोटिस नहीं है। इससे पहले भी दो बार परिवारों को स्थान खाली करने के लिए कहा जा चुका है और पर्याप्त समय दिया गया था।
निवासियों की आपत्ति
काठ बंगला कॉलोनी के कई परिवारों का कहना है कि इतनी कम अवधि में घर छोड़ना व्यावहारिक रूप से कठिन है। उनका तर्क है कि वर्षों से बसे घरों को तीन दिन में समेटना आसान नहीं होता। कुछ लोगों ने प्रशासन से अतिरिक्त समय देने की मांग की है, ताकि वे व्यवस्थित तरीके से शिफ्ट हो सकें।
निवासियों के अनुसार, उन्हें फ्लैट आवंटन की प्रक्रिया और शर्तों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी चाहिए। उनका कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए।
पिछले वर्ष भी हुई थी कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष नवंबर में भी इसी तरह का नोटिस जारी किया गया था, जिसमें 15 दिन की समय सीमा दी गई थी। उसी दौरान क्षेत्र में अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 26 मकानों को ध्वस्त किया गया था। बाद में विरोध के चलते आगे की कार्रवाई रोक दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार उस समय प्रशासन अन्य मकानों पर भी कार्रवाई की तैयारी में था, लेकिन हालात को देखते हुए कदम पीछे खींच लिया गया। अब ताजा नोटिस के बाद एक बार फिर से क्षेत्र में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
आगे क्या
प्रशासन का कहना है कि नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करना आवश्यक है और पुनर्वास की व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है। वहीं प्रभावित परिवार चाहते हैं कि उन्हें पर्याप्त समय और स्पष्ट मार्गदर्शन मिले।
फिलहाल सभी की नजर बुधवार की समय सीमा पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवार निर्धारित अवधि में शिफ्ट होते हैं या प्रशासन को आगे की कार्रवाई करनी पड़ती है।



