Stray Animal Attack: सांड को बुजुर्ग ने मारी ईंट, फिर जो हुआ उसे देख कांप जाएगी आपकी रूह…
Stray Animal Attack: हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कहावत ‘आ बैल मुझे मार’ का वास्तविक और रोंगटे खड़े कर देने वाला उदाहरण उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में देखने को मिला है। नगर कोतवाली क्षेत्र की दुर्गापुरम कॉलोनी में एक ऐसी घटना घटी जिसने इंसानी समझदारी और जानवरों के प्रति व्यवहार पर (Human Behavior) के नजरिए से कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक बुजुर्ग ने अनजाने में एक शांत जानवर को छेड़कर अपनी जान को ऐसी मुसीबत में डाल दिया, जिसकी कल्पना शायद उन्होंने सपने में भी नहीं की होगी।

आ बैल मुझे मार की कहावत तो आपने जरूर सुनी होगी। आज आप इसी कहावत का लाइव वीडियो यहां देख सकते हैं। यह वीडियो यूपी के बुलंदशहर में लगे सीसीटीवी में रिकार्ड हो गया है। अब यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।#Upnews pic.twitter.com/gCF7sZajbR
— yogesh hindustani (@yogeshhindustan) December 18, 2025
सीसीटीवी में कैद हुई खौफनाक दास्तां
यह पूरी घटना गली में लगे एक कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका लाइव (CCTV Footage) अब सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो की शुरुआत में सब कुछ बेहद सामान्य नजर आता है। कॉलोनी की एक संकरी गली में एक सांड बड़े ही शांत भाव से अपनी धुन में आगे बढ़ रहा था। वह न तो किसी राहगीर को डरा रहा था और न ही किसी संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहा था, लेकिन तभी शांति का यह माहौल एक भयावह संघर्ष में तब्दील हो गया।
बुजुर्ग की एक गलती और सांड का तांडव
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि घर के बाहर खड़े बुजुर्ग मेघराज सिंह ने बिना किसी ठोस कारण के सांड को भगाने का मन बनाया। उन्होंने जमीन से एक पत्थर उठाया और सांड के पिछले हिस्से पर पूरी ताकत से दे मारा। यहीं से (Risk Assessment) की वह चूक शुरू हुई जिसने सांड के भीतर छिपे हिंसक स्वभाव को जागृत कर दिया। पत्थर लगते ही वह बेजुबान जानवर अचानक भड़क उठा और बिजली की गति से बुजुर्ग की ओर पलटा।
जान बचाने की जद्दोजहद और सांड का कहर
बुजुर्ग को अपनी गलती का अहसास होते ही उन्होंने बचने के लिए पास खड़ी एक मोटरसाइकिल का सहारा लिया। जब उन्हें लगा कि (Safety Measures) के तौर पर बाइक उन्हें नहीं बचा पाएगी, तो वे दूसरी गली की तरफ बेतहाशा भागे। मगर क्रोधित सांड ने जैसे उन्हें सबक सिखाने की ठान ली थी। सांड ने बुजुर्ग को अपने पैने सींगों पर उठाकर हवा में कई फीट ऊपर उछाल दिया और फिर बड़ी ही बेरहमी के साथ उन्हें कंक्रीट की जमीन पर पटक दिया।
मोहल्ले में मची चीख-पुकार और बचाव कार्य
जैसे ही बुजुर्ग जमीन पर गिरे, सांड ने उन पर बार-बार हमला करना जारी रखा। गली में मची (Public Commotion) को सुनकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। बुजुर्ग की चीखें सुनकर मोहल्ले के युवक लाठी और डंडे लेकर सांड की ओर दौड़े। सांड इतना गुस्से में था कि वह किसी से डरने को तैयार नहीं था, लेकिन लोगों के सामूहिक प्रयास और शोर-शराबे के बाद उसे वहां से खदेड़ने में सफलता मिली।
अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत की जंग
इस हमले में मेघराज सिंह की हालत बेहद नाजुक हो गई है। सांड के भारी-भरकम शरीर और सींगों के प्रहार ने बुजुर्ग के शरीर की कई हड्डियां तोड़ दी हैं और उनके अंदरूनी अंगों में (Severe Injuries) आई हैं। आनन-फानन में परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही है। फिलहाल उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है और उनकी स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल और प्रशासन की चेतावनी
इंटरनेट पर इस वीडियो के वायरल होते ही लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे बुजुर्ग की भारी लापरवाही बता रहे हैं, तो कुछ (Stray Animals) की सड़कों पर मौजूदगी को लेकर प्रशासन को घेर रहे हैं। बुलंदशहर प्रशासन ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे आवारा पशुओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़खानी न करें और उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
बेजुबान जानवरों के प्रति व्यवहार पर एक बड़ी सीख
यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि बेजुबान जानवर तब तक शांत रहते हैं जब तक उन्हें उकसाया न जाए। (Animal Psychology) को समझे बिना उन्हें पत्थर मारना या डराना जानलेवा साबित हो सकता है। बुजुर्ग के साथ हुई यह त्रासदी उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो मनोरंजन या अकारण ही जानवरों को परेशान करते हैं। एक छोटी सी ईंट ने हंसते-खेलते परिवार को आज अस्पताल की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है।
निष्कर्ष: सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है
बुलंदशहर की यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति और उसके प्राणियों के साथ संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। (Precautionary Advice) यही है कि गलियों में घूमते पशुओं से हमेशा सतर्क रहें। प्रशासन को भी चाहिए कि वह सड़कों पर घूमते इन आवारा पशुओं के लिए उचित गौशालाओं का प्रबंध करे ताकि भविष्य में किसी और मेघराज सिंह को इस तरह के जानलेवा हमले का सामना न करना पड़े।



