Cervical Cancer Vaccine: सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीन है जरूरी, जानें सही उम्र
Cervical Cancer Vaccine: कैंसर आज के समय में एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, जिसका प्रभाव अब कम उम्र के युवाओं और बच्चों में भी तेजी से देखा जा रहा है। पुरुषों में जहां फेफड़ों और मुंह का कैंसर आम है, वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे अधिक दर्ज किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, (Cervical Cancer Vaccine) के प्रति जागरूकता की कमी इस बीमारी के बढ़ने का एक बड़ा कारण है। खराब जीवनशैली, तनाव और खानपान की अशुद्धता के बीच सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सही समय पर टीकाकरण और नियमित जांच के माध्यम से इस जानलेवा बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

सर्वाइकल कैंसर का कारण और एम्स की नई पहल
सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में विकसित होता है, जिसका प्राथमिक कारण ‘ह्यूमन पैपिलोमा वायरस’ (HPV) का संक्रमण है। भारत में महिलाओं के बीच इस विषय पर जानकारी का अभाव होने के कारण अक्सर रोग का पता अंतिम चरणों में चलता है। इसी समस्या के समाधान के लिए (HPV Infection Awareness) अभियान के तहत ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), दिल्ली ने एक सराहनीय कदम उठाया है। जनवरी को ‘सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस मंथ’ के रूप में मनाते हुए एम्स में 31 जनवरी तक महिलाओं के लिए मुफ्त स्क्रीनिंग की सुविधा प्रदान की जा रही है, ताकि समय रहते लक्षणों की पहचान की जा सके।
टीकाकरण की सही उम्र और प्रभावी डोज की जानकारी
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए डॉक्टर सबसे पहले एचपीवी वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं। इस वैक्सीन को लगवाने की सबसे आदर्श उम्र 9 से 14 वर्ष के बीच मानी जाती है, क्योंकि इस आयु वर्ग में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सबसे बेहतर प्रतिक्रिया देती है। (Early Vaccination Benefits) के तहत इस उम्र की लड़कियों को वैक्सीन की दो खुराकें दी जाती हैं। पहली डोज के बाद दूसरी डोज 6 से 12 महीने के अंतराल पर लगाई जाती है। अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि किशोरावस्था में लिया गया यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर सकता है।
26 से 45 वर्ष की उम्र में वैक्सीन की उपयोगिता
अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या वे वयस्क होने के बाद भी यह टीका लगवा सकती हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स और फेडरल ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के 2018 के संशोधनों के अनुसार, अब 26 से 45 वर्ष की उम्र की महिलाएं भी (Adult HPV Immunization) करवा सकती हैं। यह उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिन्होंने बचपन में टीकाकरण पूरा नहीं किया था। हालांकि, वयस्कता में इस टीके का प्रभाव व्यक्ति के पूर्व संक्रमण इतिहास पर निर्भर करता है, लेकिन यह फिर भी वायरस के नए स्ट्रेन से सुरक्षा प्रदान करने में कारगर साबित होता है।
टीकाकरण से जुड़ी सावधानियां और किन परिस्थितियों में बचें
एचपीवी वैक्सीन सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में इसे न लगवाने या टालने की सलाह दी जाती है। उदाहरण के लिए, (Pregnancy Vaccine Safety) पर अभी पर्याप्त शोध नहीं हुए हैं, इसलिए गर्भवती महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद ही टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। यदि किसी महिला को टीके की पहली खुराक से कोई गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हुआ हो, तो उसे दूसरी खुराक लेने से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य करना चाहिए। टीकाकरण आपके इम्यून सिस्टम को एचपीवी से लड़ने वाली एंटीबॉडी बनाने के लिए सक्रिय करता है, जो कैंसर की रोकथाम में ढाल का काम करती है।



