RSS Centenary: संघ शताब्दी वर्ष पर हिंदू सम्मेलन, वक्ताओं ने संगठन और संस्कृति पर दिया जोर
RSS Centenary: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सोमवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता देखी गई। अचलताल स्थित रामलीला मैदान में हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने संघ की विचारधारा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार रखे। सम्मेलन का उद्देश्य समाज में संगठन, परंपरा और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना बताया गया।

साध्वी प्राची के संबोधन की चर्चा
सम्मेलन के दौरान डॉ. साध्वी प्राची के संबोधन ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में अयोध्या और मथुरा से जुड़े धार्मिक विषयों का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने देश की एकता और सामाजिक अनुशासन पर जोर देते हुए कहा कि भारत को एकजुट रहकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उनके वक्तव्य में अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों का भी जिक्र हुआ, जिस पर उन्होंने सख्त रुख व्यक्त किया। यह बयान कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
संगठन की एकजुटता पर बल
हिंदू सम्मेलन प्रांत सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख रामशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा सामाजिक सेवा, संगठन निर्माण और राष्ट्रहित के कार्यों से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि संघ का प्रयास समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा में आगे ले जाने का रहा है। कार्यक्रम का संचालन राजनरायन सिंह ने किया, जिन्होंने आयोजन की रूपरेखा और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर कार्यक्रम अध्यक्ष ब्रज भूषण बिंदु सहित आशा देवी, राजीव भारती, विमल वार्ष्णेय, आलोक, संदेश राज, दीपक अग्रवाल, रतन वार्ष्णेय, लकी और मधुकर समेत कई स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। गिहारानगर और अचलताल बस्ती से भी बड़ी संख्या में लोग सम्मेलन में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर प्रबंध किए गए थे।
अन्य क्षेत्रों में भी आयोजन
इसी क्रम में जुपिटर लॉज, इंडस्ट्रियल एरिया में भी एक अलग हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। वहां विभाग प्रचारक गोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज को संगठित रखने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने कहा कि समाज में सहयोग और सामूहिक प्रयास से ही व्यापक कल्याण संभव है। उनके अनुसार, सामाजिक एकजुटता से ही सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा की जा सकती है।
संस्कृति और संस्कार पर चर्चा
सम्मेलन में आचार्य पवन वशिष्ठ ने हिंदू संस्कारों और भारतीय परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है और उन्हें अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जानकारी समय-समय पर देते रहना चाहिए। कार्यक्रम अध्यक्ष रमेश चंद्र वार्ष्णेय एस्ट्रो ने भी अपने संबोधन में समाज को संगठित रखने की अपील की।
खैर क्षेत्र में हुआ अलग सम्मेलन
श्री खेरेश्वर महादेव मंदिर हिंदू सम्मेलन समिति, लोधा खंड खैर के तत्वावधान में 26 जनवरी को एक अन्य हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में योगीराज हितैषी बाबा ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं और उसके सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे। मुख्य वक्ता अनमोल, जिला प्रचारक खैर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, उसके उद्देश्यों और सामाजिक योगदान पर विस्तार से जानकारी दी।
स्थानीय प्रतिनिधियों की सहभागिता
इस अवसर पर दीपेंद्र पाल सिंह, सुनील पचौरी, सुमित शहरी, हीरालाल, देवेंद्र चौहान, ऋषि ओम शर्मा, विकास सिंह, देवेंद्र सिंह, वीरेश प्रधान, जितेंद्र प्रधान, महक सिंघल और अंजू राठी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने अपने संबोधन में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और संगठनात्मक प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का समापन
सम्मेलन का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों से आपसी सहयोग और संवाद बनाए रखने की अपील की गई। आयोजकों के अनुसार, शताब्दी वर्ष के दौरान इस तरह के कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में सांस्कृतिक और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सके।



