Umar Khalid Jail Release Demand: उमर खालिद की रिहाई के लिए सात समंदर पार से उठी आवाज, अमेरिकी सांसदों ने भारत को लिखा पत्र
Umar Khalid Jail Release Demand: दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों की साजिश रचने के गंभीर आरोपों में घिरे उमर खालिद का मामला अब सात समंदर पार अमेरिका की राजनीति के केंद्र में आ गया है। जेएनयू के पूर्व छात्र की लंबी हिरासत को लेकर वॉशिंगटन में हलचल तेज हो गई है, जहां कई प्रभावशाली नेताओं ने (International Diplomatic Pressure) भारत सरकार के रुख पर सवाल खड़े किए हैं। यह मुद्दा केवल कानूनी बहस तक सीमित न रहकर अब दो लोकतांत्रिक देशों के बीच मानवाधिकारों की चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

8 अमेरिकी सांसदों ने भारतीय राजदूत को लिखा खत
ताजा घटनाक्रम में अमेरिका के 8 डेमोक्रेटिक सांसदों ने वॉशिंगटन में तैनात भारतीय राजदूत को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की है। इस चिट्ठी में एक्टिविस्ट उमर खालिद के लिए तत्काल (Bail Rights Discussion) जमानत और एक पारदर्शी एवं निष्पक्ष ट्रायल की मांग की गई है। अमेरिकी नेताओं का मानना है कि बिना किसी ठोस कानूनी कार्यवाही के लंबे समय तक किसी को सलाखों के पीछे रखना न्यायसंगत नहीं है, जिसे लेकर उन्होंने भारतीय दूतावास से हस्तक्षेप की अपील की है।
UAPA के तहत 5 साल की लंबी हिरासत पर सवाल
गौरतलब है कि उमर खालिद गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA Law Implication) के तहत पिछले पांच वर्षों से भी अधिक समय से जेल की सलाखों के पीछे हैं। अमेरिकी सांसदों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी अब तक औपचारिक रूप से ट्रायल शुरू नहीं हो सका है। सांसदों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानदंडों का उल्लंघन बताते हुए भारतीय अधिकारियों से आग्रह किया है कि मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए।
जिम मैकगवर्न और रस्किन ने किया नेतृत्व
इस पत्र का नेतृत्व अमेरिकी प्रतिनिधि जिम मैकगवर्न और जेमी रस्किन ने किया है, जिनके साथ प्रमिला जयपाल और रशीदा तलैब जैसे चर्चित नामों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। मैकगवर्न ने सोशल मीडिया पर (Human Rights Advocacy) अपनी एक पोस्ट में जानकारी साझा की कि उन्होंने हाल ही में अमेरिका दौरे पर आए उमर खालिद के माता-पिता से मुलाकात की थी। उनकी पीड़ा सुनने के बाद ही इन सांसदों ने सामूहिक रूप से भारत सरकार को अपनी चिंताओं से अवगत कराने का निर्णय लिया।
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का भावनात्मक संदेश
राजनीतिक पत्राचार के बीच न्यूयॉर्क के नवनियुक्त मेयर जोहरान ममदानी ने भी उमर खालिद के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति प्रकट की है। मेयर के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद (Emotional Political Support) ममदानी का एक हस्तलिखित संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने उमर को संबोधित करते हुए लिखा कि वे अक्सर नफरत के खिलाफ खालिद की बातों को याद करते हैं। ममदानी ने यह भी साझा किया कि खालिद के माता-पिता से मिलना उनके लिए एक भावुक क्षण था।
“नफरत को खुद पर हावी न होने देना”
जोहरान ममदानी ने अपने पत्र में उमर खालिद की वैचारिक दृढ़ता की सराहना करते हुए एक प्रेरणादायक नोट लिखा है। उन्होंने लिखा कि यह याद रखना बेहद जरूरी है कि विपरीत परिस्थितियों में भी नफरत को (Mental Strength In Jail) दिल पर हावी नहीं होने देना चाहिए। खालिद की दोस्त बानोज्योत्सना लाहिड़ी द्वारा साझा किए गए इस पत्र ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच नई चर्चा छेड़ दी है, जिससे यह साफ है कि न्यूयॉर्क प्रशासन भी इस मामले पर बारीकी से नजर रख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानदंडों और भारत का पक्ष
अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि ट्रायल के बिना किसी भी नागरिक की निरंतर हिरासत अंतरराष्ट्रीय कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। हालांकि, भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि उसकी न्यायिक प्रक्रिया (Legal Sovereignty India) पूरी तरह स्वतंत्र है और कानून अपना काम साक्ष्यों के आधार पर कर रहा है। लेकिन विदेशी धरती से सांसदों और मेयरों का इस तरह मुखर होना आगामी दिनों में इस हाई-प्रोफाइल मामले में वैश्विक दबाव को और बढ़ा सकता है।



