Uttarakhand Cabinet: उत्तराखंड में भूमि खरीद की नई नीति को कैबिनेट की मंजूरी, अब सीधे जमीन खरीद सकेंगे विभाग
Uttarakhand Cabinet: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में विकास योजनाओं की गति तेज करने और भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं को समाप्त करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई लैंड परचेज पॉलिसी को हरी झंडी दे दी गई है। इस नीति के तहत अब सरकारी विभाग अपनी विभिन्न परियोजनाओं के लिए आम जनता से सीधे जमीन खरीद सकेंगे। इस निर्णय से न केवल विभागों को जमीन जुटाने में आसानी होगी, बल्कि स्थानीय भू-स्वामियों को भी उनकी जमीन का उचित और बाजार आधारित मुआवजा मिल सकेगा, जिससे भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों में कमी आएगी।

भूमि अधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया से मिलेगी राहत
वर्तमान में किसी भी सरकारी योजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी लंबी और पेचीदा होती है। इसमें न केवल वर्षों का समय लगता है, बल्कि उचित मुआवजा न मिलने के कारण कई मामले अदालतों में लटक जाते हैं, जिससे महत्वपूर्ण विकास कार्य रुक जाते हैं। राजस्व विभाग द्वारा तैयार इस नई नीति के तहत विभाग अब आपसी सहमति के आधार पर सीधे जमीन मालिकों के साथ समझौता करेंगे। सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी के अनुसार, जमीन की दरों का निर्धारण आपसी सहमति से होगा। मौजूदा प्रावधानों के तहत सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा देने की व्यवस्था है, जिसका लाभ अब सीधे ग्रामीणों को मिल सकेगा।
भूजल के व्यावसायिक उपयोग पर देना होगा शुल्क
कैबिनेट ने राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा निर्णय लिया है। अब उत्तराखंड में भूजल और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों का व्यावसायिक उपयोग करने वाले उद्योगों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, जिसकी फीस पांच हजार रुपये निर्धारित की गई है। विभिन्न उद्योगों, जैसे कोल्ड ड्रिंक्स और मिनरल वाटर प्लांट के लिए पानी के दोहन की दर एक रुपये से लेकर 120 रुपये प्रति किलोलीटर तक तय की गई है। वहीं कूलिंग, वाशिंग और प्रोसेस इंडस्ट्री के लिए यह दर एक से सात रुपये प्रति किलोलीटर होगी। अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए एक से बीस रुपये प्रति किलोलीटर का भुगतान करना होगा।
सिडकुल की जमीन सबलेट करने के अधिकारों में संशोधन
ऊधमसिंह नगर स्थित प्राग फार्म की सिडकुल भूमि के उपयोग को लेकर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब पट्टाधारकों को आवंटित भूमि को सबलेट करने का अधिकार मिल गया है। इससे पहले नियम यह था कि आवंटित भूमि पर संबंधित पट्टाधारक को ही तीन साल के भीतर उद्योग लगाना होता था, अन्यथा पट्टा निरस्त हो जाता था। नई व्यवस्था के तहत अब उद्योग और राजस्व विभाग की अनुमति से उसी श्रेणी के अन्य उद्योगों के लिए भूमि सबलेट की जा सकेगी। इससे औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में तेजी आएगी और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।
उच्च शिक्षा का हब बनेगा उत्तराखंड और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
राज्य को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने ‘जीआरडी उत्तराखंड विश्वविद्यालय’ के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह निजी विश्वविद्यालय युवाओं के लिए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करेगा। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा के लिहाज से चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टी को रक्षा मंत्रालय को सौंपने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 को भी स्वीकृति दी है, जो पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की नई दिशा तय करेगी। साथ ही जनजाति कल्याण विभाग के ढांचे के पुनर्गठन को भी अनुमति मिल गई है, जिससे संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से हो सकेगा।



