Shukra Pradosh Vrat: आज महादेव को प्रसन्न करने का खास संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Shukra Pradosh Vrat: हिंदू धर्म कैलेंडर के अनुसार, जनवरी महीने का अंतिम प्रदोष व्रत आज यानी 30 जनवरी को मनाया जा रहा है। शुक्रवार का दिन होने के कारण इसे ‘शुक्र प्रदोष’ के नाम से जाना जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से इस दिन का अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव साधना करने से जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है और अटके हुए कार्यों में गति आती है। जो भक्त आज के दिन पूर्ण निष्ठा के साथ व्रत रखते हैं और संध्या काल में महादेव की उपासना करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यदि आप भी किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति चाहते हैं, तो आज की पूजा का विधान आपके लिए कल्याणकारी सिद्ध हो सकता है।

संध्या काल में पूजा का सटीक समय और अवधि
पंचांग गणना (Shukra Pradosh Vrat) के अनुसार, आज प्रदोष काल का आरंभ शाम 5 बजकर 15 मिनट पर होगा, जो शाम 6 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। हालांकि, विधिवत पूजन के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। भक्तों के पास अपनी प्रार्थना और अनुष्ठान संपन्न करने के लिए लगभग ढाई घंटे का पर्याप्त समय होगा। शास्त्रों में बताया गया है कि प्रदोष काल वह समय होता है जब महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं, इसलिए इस समय की गई पूजा शीघ्र फलदायी मानी जाती है।
अटके काम पूरे करने के लिए शिवलिंग पर चढ़ाएं ये विशेष सामग्री
ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्र प्रदोष के दिन कुछ विशेष वस्तुओं को अर्पित करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव भी शांत होते हैं। यदि आपकी वैवाहिक स्थिति या प्रेम जीवन में समस्याएं आ रही हैं, तो आज शिवलिंग पर कच्चा दूध और केसर मिलाकर अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त, यदि आपका कोई महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय से लंबित है, तो बेलपत्र के चिकने हिस्से पर थोड़ा सा शहद लगाकर उसे शिवलिंग पर अर्पित करें। शहद और बेलपत्र का यह संयोग महादेव को अत्यंत प्रिय है और इससे आर्थिक बाधाएं भी दूर होने की मान्यता है।
व्रत के दौरान इन बातों का रखें विशेष ख्याल
शुक्र प्रदोष का व्रत रखने वाले जातकों के लिए कुछ नियमों का पालन अनिवार्य बताया गया है। आज के दिन सात्विकता का पूर्ण ध्यान रखें और मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। व्रत की अवधि में अपने व्यवहार और वाणी पर संयम रखना आवश्यक है; किसी को अपशब्द न कहें और न ही क्रोध करें। मानसिक शांति के साथ शिव नाम का जप करना ही वास्तविक व्रत है। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि महादेव को कोई भी खंडित सामग्री अर्पित न करें। यदि आप केसर या अक्षत चढ़ा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वे पूरी तरह साबुत हों।
शुक्र प्रदोष का ज्योतिषीय महत्व
चूंकि यह व्रत शुक्रवार को पड़ा है, इसलिए इसका सीधा संबंध शुक्र ग्रह से भी माना जाता है। शुक्र देव को विलासिता, सौंदर्य और ऐश्वर्य का कारक माना गया है। ऐसे में जो लोग आज के दिन शिव-शक्ति की पूजा करते हैं, उनकी कुंडली में शुक्र की स्थिति मजबूत होती है, जिससे उन्हें भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। गृहस्थ जीवन में मधुरता लाने और करियर में सफलता पाने के लिए आज शाम को घी का दीपक जलाकर ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना सर्वोत्तम रहता है।



