बिहार

HousingScheme – प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितता, 387 लाभार्थी राशि लेकर लापता

HousingScheme – प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जिले में एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती सामने आई है। योजना के अंतर्गत आवंटित राशि लेने के बाद 387 लाभार्थी ऐसे पाए गए हैं, जिनका न तो कोई पता चल रहा है और न ही उनके द्वारा अब तक आवास निर्माण शुरू किया गया है। विभागीय स्तर पर जब भौतिक सत्यापन कराया गया, तो कई पते गलत मिले और अनेक गांवों में संबंधित लाभार्थियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

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भौतिक सत्यापन में सामने आई गंभीर स्थिति

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराए गए हालिया सत्यापन के दौरान कर्मचारियों को लाभार्थियों के पते पर भेजा गया था। लेकिन बड़ी संख्या में मामलों में न तो लाभार्थी मिले और न ही निर्माण कार्य के कोई संकेत दिखाई दिए। विभाग ने इसके बाद संबंधित पते पर नोटिस भी जारी किए, लेकिन अधिकांश नोटिसों का कोई जवाब अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। इससे विभाग की चिंता और बढ़ गई है।

पुराने वित्तीय वर्षों के लाभार्थी ज्यादा संदिग्ध

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, लापता पाए गए लाभार्थियों में सबसे अधिक चयन वित्तीय वर्ष 2020-21 में हुआ था। इस अवधि के 232 लाभार्थियों का अब तक कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। इसके अलावा वर्ष 2019-20 के 97 लाभार्थी भी इसी श्रेणी में हैं। शेष लगभग 15 प्रतिशत लाभार्थी 2018-19 और उससे पहले के वर्षों में चयनित किए गए थे, जिनका अब तक सत्यापन नहीं हो सका है।

कुछ प्रखंडों में समस्या अधिक गहरी

जिले के कुछ प्रखंडों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक गंभीर पाई गई है। पारू, औराई, कटरा और गायघाट प्रखंडों से सबसे ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं। इन चारों प्रखंडों में कुल लापता लाभार्थियों की संख्या 299 बताई गई है, जो कुल मामलों का लगभग 77 प्रतिशत है। अकेले पारू प्रखंड में 92 लाभार्थी ऐसे हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। औराई में यह संख्या 75, कटरा में 67 और गायघाट में 65 दर्ज की गई है।

अन्य प्रखंडों से भी मिले मामले

इनके अलावा सकरा, मड़वन, बंदरा, साहेबगंज, कुढ़नी, मीनापुर और मोतीपुर प्रखंडों से भी कुल 88 लाभार्थियों की पहचान की गई है, जिनके बारे में विभाग के पास स्पष्ट जानकारी नहीं है। इन सभी मामलों में एक समान स्थिति यह है कि राशि का भुगतान हो चुका है, लेकिन आवास निर्माण शुरू नहीं हुआ।

पलायन और मृत्यु के कारण बढ़ी जटिलता

विभागीय सूत्रों का कहना है कि लगभग 32 प्रतिशत लाभार्थियों के बारे में यह जानकारी मिली है कि वे रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं। इसके साथ ही 50 से अधिक लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन तकनीकी और दस्तावेजी कारणों से उनके नाम अभी तक सूची से हटाए नहीं जा सके हैं। यह स्थिति प्रशासनिक प्रक्रिया को और जटिल बना रही है।

सूची से नाम हटाने और कानूनी कार्रवाई की तैयारी

डीआरडीए निदेशक संजय कुमार ने बताया कि जिन लाभार्थियों ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। विभाग स्तर पर ऐसे लाभार्थियों के नाम योजना की सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही सरकारी राशि की वसूली के लिए एफआईआर दर्ज कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है।

प्रशासन के लिए भरोसे की परीक्षा

प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना में सामने आए ये मामले न केवल प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि पात्र जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करते हैं। विभाग का कहना है कि भविष्य में सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा ताकि इस तरह की अनियमितताओं को समय रहते रोका जा सके।

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