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GuruDutt – अधूरी रह गई एक बंगाली फिल्म और टूटते रिश्तों की कहानी

GuruDutt – हिंदी सिनेमा में गुरु दत्त का नाम सिर्फ एक फिल्मकार या अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और गहरी रचनात्मकता के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। कम शब्दों में कहें तो वे ऐसे कलाकार थे, जिनकी हर फिल्म में उनका निजी जीवन, भावनाएं और संघर्ष झलकते थे। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। इन्हीं में से एक किस्सा उस अधूरी बंगाली फिल्म से जुड़ा है, जिसे गुरु दत्त ने बड़े सपनों के साथ शुरू तो किया, लेकिन निजी टकराव के कारण पूरा नहीं कर पाए।

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बंगाली सिनेमा की ओर गुरु दत्त का झुकाव

बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरु दत्त केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहना चाहते थे। वे क्षेत्रीय सिनेमा, खासकर बंगाली फिल्मों की संवेदनशील कहानी कहने की परंपरा से काफी प्रभावित थे। इसी सोच के तहत उन्होंने एक बंगाली फिल्म बनाने का निर्णय लिया, जिसका नाम था ‘गौरी’। यह फिल्म पूरी तरह ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित थी और इसकी कहानी एक सादे, सहज जीवन को दर्शाने के लिए लिखी गई थी।

कोलकाता में शुरू हुई शूटिंग

फिल्म ‘गौरी’ की शूटिंग के लिए गुरु दत्त अपनी पूरी टीम के साथ कोलकाता पहुंचे। लोकेशन शहर से दूर गांव-देहात के इलाकों में चुनी गई थी, ताकि कहानी का माहौल वास्तविक लगे। गुरु दत्त इस फिल्म में निर्देशन के साथ-साथ अभिनय भी कर रहे थे। उन्होंने नायिका के रूप में अपनी पत्नी और मशहूर गायिका गीता दत्त को चुना, जो उस समय उनके जीवन और करियर का अहम हिस्सा थीं।

सेट पर अनुशासन और गुरु दत्त की अपेक्षाएं

लेखक बिमल मित्र ने अपनी किताब ‘बिछड़े सभी बारी-बारी’ में इस फिल्म से जुड़ा पूरा प्रसंग दर्ज किया है। उनके अनुसार, गुरु दत्त सेट पर बेहद अनुशासनप्रिय थे और हर दृश्य को लेकर उनकी स्पष्ट कल्पना होती थी। एक दिन आउटडोर शूटिंग के दौरान पूरी यूनिट सुबह-सुबह तय स्थान पर पहुंच चुकी थी। कैमरा, लाइट और अन्य तैयारियां पूरी थीं और गीता दत्त को मेकअप के लिए भेजा गया।

मेकअप को लेकर बढ़ा तनाव

चूंकि फिल्म गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित थी, गुरु दत्त चाहते थे कि नायिका का मेकअप और हेयरस्टाइल बेहद साधारण हो। कुछ समय बाद उन्होंने गीता को बुलवाया, लेकिन गीता ने थोड़ा और वक्त मांगा। दोबारा बुलाने पर भी वही जवाब मिला। आखिरकार गुरु दत्त खुद मेकअप रूम पहुंचे, जहां उन्हें गीता का लुक उनकी कल्पना से अलग लगा।

हेयरस्टाइल बना विवाद की वजह

गुरु दत्त ने गीता से साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने नायिका के लिए इतना सादा लुक चाहा था, फिर यह हेयरस्टाइल क्यों चुनी गई। उनका सवाल था कि क्या गांव की लड़कियां इस तरह से जूड़ा बनाती हैं। इस टिप्पणी से गीता आहत हो गईं और बात बहस में बदल गई।

एक वाक्य और टूट गया सब्र

बहस के दौरान गीता दत्त ने भावुक होकर यह कह दिया कि क्या गुरु दत्त चाहते हैं कि वह वहीदा रहमान से भी बदतर दिखें। यह सुनते ही गुरु दत्त का गुस्सा भड़क उठा। वे बिना कुछ और कहे कमरे से बाहर निकले और सेट पर जोर-जोर से पैकअप का आदेश देने लगे।

अधूरी रह गई फिल्म ‘गौरी’

गुस्से में गुरु दत्त शूटिंग छोड़कर अपनी गाड़ी से वहां से चले गए। इसके बाद फिल्म की शूटिंग दोबारा शुरू नहीं हो सकी। किताब के अनुसार, इस फिल्म के लिए पहले ही सात रील शूट हो चुकी थीं और गुरु दत्त इस प्रोजेक्ट पर बड़ी रकम खर्च कर चुके थे। इसके बावजूद ‘गौरी’ कभी पूरी नहीं हो पाई और यह फिल्म इतिहास की अधूरी कहानियों में शामिल हो गई।

निजी रिश्ते और रचनात्मक संघर्ष

यह घटना सिर्फ एक फिल्म के अधूरा रह जाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे निजी रिश्तों में तनाव एक कलाकार के रचनात्मक सफर को भी प्रभावित कर सकता है। गुरु दत्त और गीता दत्त के रिश्ते में यह एक ऐसा मोड़ था, जिसने उनके निजी और पेशेवर जीवन पर गहरा असर डाला।

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