H1BPolicy – अमेरिकी संसद में पेश हुआ वीजा योजना के अंत का फरमान
H1BPolicy – अमेरिका में रोजगार और आव्रजन नीति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने प्रतिनिधिसभा में एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके जरिये H1B वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। उनका तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था अमेरिकी नागरिकों के बजाय विदेशी पेशेवरों को प्राथमिकता देती है, जिससे स्थानीय कर्मचारियों के अवसर प्रभावित होते हैं। इस पहल ने खास तौर पर उन देशों के पेशेवरों में चिंता बढ़ा दी है, जिनके नागरिक बड़ी संख्या में इस वीजा के तहत अमेरिका में काम कर रहे हैं।

वीजा योजना खत्म करने का प्रस्ताव क्या कहता है
स्ट्यूबी द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का नाम ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट’ रखा गया है, जिसे संक्षेप में एक्साइल एक्ट कहा जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम में संशोधन कर H1B वीजा कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। सांसद का कहना है कि अमेरिकी श्रम बाजार में प्रतिस्पर्धा का संतुलन बिगड़ रहा है और इससे देश के युवाओं के रोजगार अवसर सीमित हो रहे हैं। उनके मुताबिक, यह कदम अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देने की दिशा में जरूरी है।
विधेयक में शामिल प्रमुख प्रावधान
स्ट्यूबी के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस बिल के तहत आव्रजन कानून की धारा 214(जी)(1)(ए) में बदलाव का प्रस्ताव है। योजना है कि वित्तीय वर्ष 2027 से H1B वीजा की संख्या को शून्य कर दिया जाए। यानी नए आवेदनों के लिए कोई कोटा निर्धारित नहीं होगा। हालांकि फिलहाल यह प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है और आगे की प्रक्रिया संसदीय समितियों की समीक्षा पर निर्भर करेगी।
H1B वीजा क्या है और क्यों अहम है
H1B वीजा अमेरिका का एक नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीजा है, जिसके तहत कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, वित्त और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में इसकी खास भूमिका रही है। कई अमेरिकी कंपनियां वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए इसी कार्यक्रम का सहारा लेती हैं। यह वीजा आमतौर पर तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है और कुछ शर्तों के साथ इसका विस्तार भी संभव होता है।
योजना की पृष्ठभूमि और राजनीतिक बहस
H1B कार्यक्रम की शुरुआत उन क्षेत्रों में विशेषज्ञता की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से की गई थी, जहां घरेलू स्तर पर पर्याप्त कुशल श्रमिक उपलब्ध नहीं थे। समय के साथ यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में करियर बनाने का प्रमुख माध्यम बन गई। लेकिन वेतन, नौकरी की सुरक्षा और स्थानीय कामगारों के हित जैसे मुद्दों पर इसे लेकर लगातार बहस होती रही है। कई राजनीतिक नेता इसे रोजगार संरक्षण के नजरिये से देखते हैं, जबकि उद्योग जगत इसे नवाचार और प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी मानता है।
भारतीय पेशेवरों पर संभावित प्रभाव
आंकड़ों के अनुसार, H1B वीजा प्राप्त करने वालों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जो कुल स्वीकृत वीजा का बड़ा भाग बनाती है। खासकर सूचना प्रौद्योगिकी और टेक सेक्टर में भारतीय इंजीनियर और विशेषज्ञ बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। यदि यह विधेयक आगे बढ़ता है और कानून का रूप लेता है, तो इसका सीधा असर भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिका में करियर की योजना बना रहे युवाओं पर पड़ सकता है।
संसदीय प्रक्रिया अभी बाकी
फिलहाल यह विधेयक प्रतिनिधिसभा में पेश किया गया है। अब इसे संबंधित समिति के पास भेजा जाएगा, जहां इस पर विचार-विमर्श और संभावित सुनवाई होगी। यदि समिति इसे मंजूरी देती है, तो प्रतिनिधिसभा में मतदान होगा। वहां से पारित होने के बाद इसे सीनेट में भेजा जाएगा। दोनों सदनों की स्वीकृति और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही यह कानून बन पाएगा।
वीजा शुल्क में हालिया बदलाव
इस बीच, बीते वर्ष अमेरिकी प्रशासन ने H1B वीजा से संबंधित शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की थी। नई व्यवस्था के तहत आवेदन के समय एकमुश्त शुल्क काफी बढ़ा दिया गया है। पहले जहां आवेदन प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम लागत में पूरी हो जाती थी, वहीं अब शुल्क में भारी इजाफा किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और लागत संतुलन के लिए उठाया गया है।
आगे की राह पर नजर
H1B वीजा को लेकर यह नया प्रस्ताव अमेरिकी रोजगार नीति पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है। उद्योग जगत, प्रवासी समुदाय और नीति निर्माताओं के बीच इस मुद्दे पर मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं। आने वाले महीनों में संसदीय चर्चा और राजनीतिक रुख यह तय करेंगे कि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है या नहीं। फिलहाल, इस विषय पर अंतिम निर्णय आना बाकी है और इससे जुड़े लाखों पेशेवर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।



