International Relations: ईरान के परमाणु ठिकानों पर बढ़ी हलचल, अमेरिकी सैन्य तैनाती के बीच बढ़ी परमाणु युद्ध की आशंका
International Relations: मध्य पूर्व में चल रही भारी उथल-पुथल और वाशिंगटन के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान से आई नई सैटेलाइट तस्वीरों ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। इन तस्वीरों से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान ने अपने उन दो प्रमुख परमाणु केंद्रों पर दोबारा काम शुरू कर दिया है, जो पिछले साल जून में इजरायल और अमेरिका के साथ हुए संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए थे। ईरान की ओर से अपने परमाणु कार्यक्रमों को लेकर बरती जा रही गोपनीयता के कारण यह अंदेशा गहरा गया है कि यदि अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है, तो जवाब में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की नौबत आ सकती है।

परमाणु ठिकानों की किलेबंदी और नई युद्धनीति
ताजा सैटेलाइट डेटा के अनुसार, तेहरान ने फोर्डो और नटांज स्थित अपने परमाणु केंद्रों की सुरक्षा के लिए नई रणनीति अपनाई है। इन ठिकानों के चारों ओर मिट्टी के विशाल ऊंचे पहाड़ खड़े किए गए हैं और मलबे के नीचे ही नई छतों का निर्माण किया जा रहा है। रक्षा जानकारों का मानना है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार और संवेदनशील तकनीक को जमीन में इतनी गहराई पर छिपा रहा है कि किसी भी बड़े हवाई या मिसाइल हमले का उन पर कोई असर न हो। इस तरह की किलेबंदी साफ तौर पर एक लंबे और बड़े टकराव की तैयारी की ओर इशारा करती है।
राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी और पेंटागन की सक्रियता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जनवरी 2026 को ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि तेहरान अमेरिकी शर्तों को नहीं मानता है, तो उस पर “तेजी से” सैन्य प्रहार किया जा सकता है। इस धमकी को अमली जामा पहनाने के लिए पेंटागन ने फारस की खाड़ी के पास अपने विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ विध्वंसक जहाजों और घातक बमवर्षकों की तैनाती कर दी है। अमेरिका की मुख्य मांग है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को दी जाने वाली सहायता पर रोक लगाए।
ईरान की आंतरिक स्थिति और संभावित जोखिम
9.3 करोड़ की आबादी वाला ईरान वर्तमान में आर्थिक बदहाली और घरेलू विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है। बावजूद इसके, वहां का सुरक्षा तंत्र और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) जैसी संस्थाएं काफी मजबूत मानी जाती हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी स्वीकार किया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा होना आसान नहीं है और यदि ऐसा होता है, तो उसके बाद पैदा होने वाली अनिश्चितता और भी खतरनाक हो सकती है। विशेषज्ञ डरते हैं कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को और अधिक तेज कर सकता है।
वैश्विक परमाणु सुरक्षा और ऐतिहासिक उदाहरणों का दबाव
ईरान की इस आक्रामक मुद्रा के पीछे लीबिया और यूक्रेन जैसे ऐतिहासिक उदाहरण भी हैं। लीबिया ने अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ दिया था लेकिन बाद में वहां सैन्य हस्तक्षेप हुआ, वहीं यूक्रेन ने अपने हथियार त्यागने के बाद क्षेत्रीय हमले झेले। इन घटनाओं ने ईरान के इस विश्वास को पुख्ता किया है कि वास्तविक सुरक्षा केवल परमाणु शक्ति संपन्न होने में ही निहित है। यदि ईरान पर सैन्य हमला होता है, तो इससे सऊदी अरब, तुर्किये, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी अपनी स्वतंत्र परमाणु क्षमता विकसित करने की होड़ लग सकती है, जो वैश्विक शांति के लिए बड़ी चुनौती होगी।