MasterRaju – शूटिंग के दौर की दिलचस्प यादें साझा करके चर्चा में आए महानायक
MasterRaju – हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में बाल कलाकार के रूप में पहचान बनाने वाले राजू श्रेष्ठा, जिन्हें दर्शक मास्टर राजू के नाम से जानते हैं, ने अपने फिल्मी सफर से जुड़ी कुछ रोचक बातें साझा की हैं। 70 के दशक से लेकर 2000 के दशक तक सक्रिय रहे मास्टर राजू ने कई बड़े निर्देशकों और सितारों के साथ काम किया। एक समय ऐसा भी था जब वह लगातार फिल्मों में नजर आते थे और निर्माताओं की पहली पसंद बने हुए थे। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने व्यस्त शेड्यूल और अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अनुभव को याद किया।

काम की व्यस्तता और सेट का माहौल
मास्टर राजू ने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दौर में उनके पास इतनी फिल्में थीं कि समय निकालना भी चुनौती बन जाता था। उन्होंने फिल्म ‘फरार’ की शूटिंग का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान उनका कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहता था। उनके मुताबिक, वह एक ही दिन में कई प्रोजेक्ट्स की शूटिंग करते थे, इसलिए सेट पर उनके समय का खास ध्यान रखा जाता था। दिलचस्प बात यह रही कि कई बार वरिष्ठ कलाकारों को भी उनके शॉट पूरे होने तक इंतजार करना पड़ता था।
अमिताभ बच्चन से जुड़ा किस्सा
बातचीत में उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उस समय अमिताभ बच्चन सेट पर समय से पहुंच जाते थे, लेकिन उनके पास अपेक्षाकृत कम प्रोजेक्ट्स थे। मास्टर राजू के अनुसार, फिल्म के कुछ दृश्यों में पहले अमिताभ बच्चन के क्लोज-अप ले लिए जाते थे। इसके बाद जब वह सेट पर पहुंचते, तो उनके हिस्से के दृश्य प्राथमिकता से फिल्माए जाते थे क्योंकि उन्हें अगले शूट के लिए निकलना होता था। ऐसे में कभी-कभी अमिताभ बच्चन को उनके शॉट पूरे होने तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।
मां की डांट वाला प्रसंग
इसी फिल्म से जुड़ा एक और प्रसंग उन्होंने साझा किया। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान एक दृश्य में अमिताभ बच्चन के हाथ पर घाव का मेकअप किया गया था, जिस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। उस समय लंच ब्रेक चल रहा था और सभी कलाकार खाना खा रहे थे। मास्टर राजू की मां, जो अक्सर उनके साथ सेट पर मौजूद रहती थीं, ने इस स्थिति पर आपत्ति जताई। उन्होंने विनम्रता से अमिताभ बच्चन से कहा कि घाव को ढक लें, ताकि आसपास स्वच्छता बनी रहे। यह घटना उस दौर की सहज और पारिवारिक माहौल की झलक दिखाती है।
अनुशासन और समय की पाबंदी
मास्टर राजू ने उस समय के फिल्म उद्योग में समय की पाबंदी को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि कई बड़े सितारे शूटिंग पर देर से पहुंचते थे, जिसे उस दौर में सामान्य माना जाता था। उनके अनुसार, विनोद खन्ना, संजीव कुमार, राजेश खन्ना और धर्मेंद्र जैसे कई कलाकार अक्सर निर्धारित समय से बाद में आते थे। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमिताभ बच्चन समय के बेहद पाबंद थे और सेट पर तय समय से पहले पहुंचना उनकी आदत थी।
फिल्मी सफर की झलक
बाल कलाकार के रूप में मिली लोकप्रियता ने मास्टर राजू को लंबे समय तक व्यस्त रखा। उन्होंने यश चोपड़ा और बसु चटर्जी जैसे निर्देशकों के साथ काम किया और अनेक यादगार फिल्मों का हिस्सा बने। उनका कहना है कि उस दौर में काम का दबाव जरूर था, लेकिन माहौल आत्मीय और सहयोगपूर्ण रहता था।
आज जब वह अपने करियर के उन पलों को याद करते हैं, तो उन्हें आश्चर्य भी होता है कि किस तरह कम उम्र में उन्होंने इतने बड़े कलाकारों के साथ काम किया। उनके अनुभव हिंदी सिनेमा के उस दौर की कार्यशैली और माहौल को समझने का एक दिलचस्प अवसर देते हैं।



