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झारखण्ड

LiquorScam – झारखंड शराब घोटाला मामले में कारोबारी के सिर पर फूटा कार्यवाही का बम

LiquorScam – झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पटना स्थित एडीएसईपी मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक श्यामजी शरण की मुश्किलें अब और बढ़ती दिख रही हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की पड़ताल में कंपनी के लेन-देन और बैंक गारंटी से जुड़े कई संदिग्ध पहलुओं की जानकारी मिली है, जिसके बाद जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।

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गुप्त समझौते का खुलासा

एसीबी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, श्यामजी शरण की कंपनी ने मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली कंपनी विजन हॉस्पिटैलिटी के साथ एक गोपनीय समझौता किया था। यह समझौता आधिकारिक रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसी समझौते के बाद वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया। 13 अक्तूबर 2023 के बाद एक नई बैंक गारंटी जमा की गई, जिसके तुरंत बाद दोनों कंपनियों के बीच संवाद लगभग समाप्त हो गया। इस तथ्य ने एजेंसी के संदेह को और गहरा किया है।

फर्जी बैंक गारंटी का मामला

जांच में सामने आया कि विजन हॉस्पिटैलिटी ने प्रारंभ में बैंक ऑफ बड़ौदा की वैध बैंक गारंटी प्रस्तुत की थी। बाद में इसे बदलकर नई दिल्ली स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक के नाम से जारी कथित बैंक गारंटी जमा कराई गई। यह गारंटी 5 करोड़ 35 लाख 35 हजार 241 रुपये की बताई गई। एसीबी को संदेह हुआ तो उसने संबंधित बैंक से संपर्क किया। बैंक की ओर से लिखित जवाब में स्पष्ट किया गया कि इस तरह की कोई गारंटी उनके द्वारा जारी नहीं की गई। इतना ही नहीं, गारंटी पत्र पर दर्ज लेटरहेड और मुहर भी जाली पाए गए। जिस अधिकारी के हस्ताक्षर दस्तावेज में दर्शाए गए थे, उस नाम का कोई अधिकारी बैंक में कार्यरत ही नहीं है।

निदेशक का बयान और साजिश के संकेत

विजन हॉस्पिटैलिटी के निदेशक ने जांच एजेंसी को दिए बयान में कहा कि बैंक गारंटी बदलने का सुझाव श्यामजी शरण की ओर से आया था। बयान के अनुसार, पुराने दस्तावेज को हटाकर नई गारंटी लगाने की प्रक्रिया उनके कहने पर पूरी की गई। एसीबी इस बयान को मामले में अहम कड़ी मान रही है। एजेंसी का मानना है कि यदि यह तथ्य अदालत में सिद्ध होता है तो यह एक सुनियोजित साजिश का संकेत होगा। इसी आधार पर श्यामजी शरण को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया है।

जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई

एसीबी अधिकारियों ने बैंक के संबंधित शाखा प्रबंधकों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं। दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फर्जी कागजात किस स्तर पर और कैसे तैयार किए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि यदि वित्तीय लेन-देन में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाएगी। फिलहाल एजेंसी सबूतों को मजबूत करने में जुटी है।

भूमि घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से राहत

इधर, एक अन्य चर्चित मामले में नेक्सजेन कंपनी के मालिक विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को राहत मिली है। हजारीबाग वन भूमि घोटाले से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने विनय सिंह को दो मामलों में नियमित जमानत दी है। वहीं, स्निग्धा सिंह के खिलाफ तीन मामलों में किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है। शीर्ष अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जमानत मिलने के बावजूद नए मामले दर्ज होना चिंता का विषय है। हजारीबाग एसीबी में दर्ज प्रकरण की सुनवाई अब निचली अदालत में जारी रहेगी।

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