बिहार

ForestRevival – पौड़ी में सात वन पंचायतों ने बदली जंगल की तस्वीर

ForestRevival – उत्तराखंड के पौड़ी जिले में सामुदायिक भागीदारी ने पर्यावरण संरक्षण की एक उल्लेखनीय मिसाल पेश की है। रामनगर वन प्रभाग के नैनीडांडा रेंज के अंतर्गत सात वन पंचायतों ने मिलकर जिस 10 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित किया, वह आज हरियाली और जल संरक्षण का सशक्त उदाहरण बन चुका है। जिन इलाकों में कभी सूखा और पलायन चिंता का कारण थे, वहां अब जंगल और जलस्रोत दोनों ने नई जिंदगी पाई है।

pauri van panchayat forest revival model

सात पंचायतों की साझा पहल

जोगीड़ा पल्ला, जोगीड़ा वला, केलधार, टेटगांव, मोक्षण, गुनिया मोक्षण और उनियाल मोक्षण की वन पंचायतों के ग्रामीणों ने वन विभाग के साथ मिलकर संरक्षण का यह अभियान शुरू किया। डीएफओ मनीष जोशी के अनुसार, एक समय इन क्षेत्रों में अत्यधिक दबाव और सीमित हरियाली के कारण जंगल तेजी से क्षरण की ओर बढ़ रहे थे।

स्थिति को सुधारने के लिए वर्ष 2011-12 में 10 हेक्टेयर भूमि पर बांज, बुरांश, काफल, तेजपात और पद्म जैसी स्थानीय प्रजातियों के पौधे रोपे गए। इन पौधों की देखभाल और सुरक्षा में ग्रामीणों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

जलस्रोतों में लौटी धार

इस पहल का सबसे बड़ा परिणाम जल संरक्षण के रूप में सामने आया है। वर्षों से सूखे पड़े 12 से अधिक प्राकृतिक स्रोत फिर से सक्रिय हो गए हैं। वन क्षेत्र में घनी वनस्पति बढ़ने से मिट्टी में नमी बनी रही और वर्षा जल का बेहतर संचयन हुआ।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जंगल घना हुआ, भूजल स्तर में सुधार दिखने लगा। इसका सीधा लाभ आसपास के गांवों को मिला, जहां पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी।

वन्यजीवों को मिला सुरक्षित आवास

नैनीडांडा रेंज के रेंजर तपन अधिकारी ने बताया कि विकसित क्षेत्र अब वन्यजीवों के लिए अनुकूल आवास बन चुका है। पहले जहां भोजन और छांव की कमी थी, वहां अब विविध प्रजातियों को बेहतर पर्यावरण मिल रहा है।

इसके साथ ही आसपास के प्राकृतिक वनों पर दबाव कम हुआ है। स्थानीय स्तर पर ईंधन और चारे की उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीणों की निर्भरता भी संतुलित हुई है।

पलायन की समस्या पर असर

ग्रामीणों का कहना है कि हरियाली और जलस्रोतों के पुनर्जीवन से गांवों की तस्वीर बदली है। खेती और पशुपालन को नया आधार मिला है, जिससे आजीविका के अवसर बढ़े हैं। इससे पलायन की रफ्तार पर भी सकारात्मक असर पड़ा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि सामुदायिक भागीदारी के बिना इस तरह की सफलता संभव नहीं होती। यहां ग्रामीणों और वन विभाग के बीच समन्वय ने एक टिकाऊ मॉडल प्रस्तुत किया है।

अन्य क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी

इस सफल प्रयोग को देखते हुए वन विभाग अब धूमकोट, नैनीडांडा, रिंगलान और कुमाऊं क्षेत्र की सल्ट रेंज समेत 540 वन पंचायतों में इसी तरह का अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। उद्देश्य है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से अधिक से अधिक क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाई जाए।

अधिकारियों का कहना है कि इस मॉडल को अपनाकर जल संरक्षण, जैव विविधता और ग्रामीण आजीविका को एक साथ मजबूत किया जा सकता है। पौड़ी का यह प्रयास दर्शाता है कि सामूहिक संकल्प से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस बदलाव संभव है।

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