RajyaSabhaPolitics – हिना शहाब के नाम पर AIMIM ने जताई आपत्ति
RajyaSabhaPolitics – बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व सांसद दिवंगत मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को संभावित उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाओं के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने अलग रुख अपनाया है। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारने की तैयारी में है और इसके लिए राष्ट्रीय जनता दल से समर्थन की अपेक्षा रखती है।

AIMIM ने मांगा महागठबंधन का साथ
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि AIMIM का राज्यसभा में अब तक कोई प्रतिनिधि नहीं है। उनका कहना था कि यदि महागठबंधन रणनीतिक रूप से निर्णय ले तो एक सीट जीतना संभव है। उन्होंने RJD और कांग्रेस से आग्रह किया कि वे AIMIM को उच्च सदन में पहली बार प्रतिनिधित्व दिलाने का अवसर दें। ईमान ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी और महागठबंधन की विचारधारा कई मुद्दों पर समान है, इसलिए सहयोग स्वाभाविक होना चाहिए।
हिना शहाब के नाम पर असहमति
विधानसभा परिसर के बाहर पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि यदि RJD हिना शहाब को उम्मीदवार बनाती है तो AIMIM का क्या रुख होगा, इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी शुरू से अपने प्रत्याशी के समर्थन की मांग कर रही है। यदि सहयोग नहीं मिलता है तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। उनके बयान से संकेत मिला कि AIMIM बिहार से राज्यसभा चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है।
RJD के भीतर भी उठी मांग
इसी बीच RJD के विधायक भाई वीरेंद्र ने सार्वजनिक रूप से हिना शहाब को राज्यसभा भेजने की पैरवी की। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस पर विचार करने की अपील की और दावा किया कि यदि ऐसा होता है तो राजनीतिक रूप से कई समीकरण एक साथ साधे जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि AIMIM समर्थन दे सकती है और सत्ताधारी गठबंधन के कुछ विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इस दावे पर अन्य दलों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
संख्या बल पर टिकी निगाहें
बिहार में इस बार राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव होना है। नामांकन प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर सत्ताधारी गठबंधन चार सीटों पर मजबूत स्थिति में है। पांचवीं सीट के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। वहीं महागठबंधन को भी अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए अतिरिक्त मतों की जरूरत पड़ेगी।
ऐसे में AIMIM के पांच विधायकों और एक विधायक वाली बसपा की भूमिका अहम मानी जा रही है। राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और संभावित रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कौन सा दल किसे समर्थन देता है और अंतिम रूप से उम्मीदवारों की सूची क्या होती है।
फिलहाल राज्यसभा चुनाव ने बिहार की राजनीति में नई सरगर्मी ला दी है। सभी दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं और निर्णयों का असर आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है।



