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Bihar Hooch Tragedy News: बिहार में छलक रहे हैं मौत के जाम, पिता की मौत के बाद बेटे की दुनिया में छाया अंधेरा

Bihar Hooch Tragedy News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद जहरीली शराब का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। समस्तीपुर जिले के सरायरंजन से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। एक पिता और पुत्र ने साथ बैठकर जिस शराब का सेवन किया, उसने (Illegal Alcohol Consumption) के खौफनाक अंजाम की कहानी लिख दी। पिता की तड़प-तड़प कर जान चली गई, वहीं जवान बेटे की आंखों के सामने हमेशा के लिए अंधेरा छा गया। यह घटना न केवल एक परिवार की तबाही है, बल्कि शराबबंदी वाले राज्य में प्रशासनिक मुस्तैदी पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है।

Bihar Hooch Tragedy News
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एक जनवरी की वो शाम जो मातम में बदल गई

घटना की शुरुआत नए साल के जश्न के साथ हुई थी, जब बखरी बुजुर्ग गांव के वार्ड संख्या 12 में रहने वाले 60 वर्षीय बालेश्वर साह और उनके 36 वर्षीय बेटे बबलू कुमार साह ने गांव के ही एक धंधेबाज से शराब मंगवाई थी। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, (Village Liquor Smuggling) का नेटवर्क इतना मजबूत था कि घर बैठे ही मौत का सामान उपलब्ध करा दिया गया। पिता-पुत्र ने मिलकर तीन बोतलें खाली कीं, लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिसे वे उत्सव का हिस्सा मान रहे हैं, वह दरअसल उनकी जिंदगी का आखिरी जाम साबित होने वाला है।

आंखों की रोशनी गई और उखड़ती सांसों का संघर्ष

शराब पीने के कुछ ही समय बाद दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी। सिर चकराने और धुंधला दिखाई देने की शिकायत के बाद उन्हें स्थानीय डॉक्टरों के पास ले जाया गया। स्थिति में सुधार न होते देख 3 जनवरी को उन्हें समस्तीपुर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। वहां बालेश्वर साह ने (Victims of Spurious Liquor) के रूप में अपनी अंतिम सांस ली। वहीं, बबलू की हालत इतनी गंभीर हो गई कि उसे तत्काल पटना रेफर करना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने पुष्टि की कि जहरीले रसायनों के कारण उसकी दोनों आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है।

बहू की बहादुरी से खुला मौत का राज

इस दर्दनाक घटना का खुलासा तब हुआ जब परिवार की बहू राधा देवी ने हिम्मत दिखाते हुए थाने की चौखट पर कदम रखा। आमतौर पर (Social Stigma of Alcoholism) और पुलिसिया कार्रवाई के डर से लोग ऐसी घटनाओं को दबा देते हैं, लेकिन राधा ने मुसारीघरारी थाने में आवेदन देकर इंसाफ की गुहार लगाई। उन्होंने सीधे तौर पर गांव के धंधेबाज अरविंद साह उर्फ बंठा पर जहरीली शराब बेचने का आरोप लगाया। महिला के साहस के कारण ही आज प्रशासन इस मामले की तह तक जाने के लिए मजबूर हुआ है।

छह महीने पहले ही एक्सपायर हो चुका था जहर

जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं। पीड़ित परिवार के अनुसार, शराब की जिन बोतलों का सेवन किया गया, वे ‘टेट्रा पैक’ वाली थीं और उन पर अंकित तारीख के अनुसार वे 6 माह पहले ही एक्सपायर हो चुकी थीं। (Expired Alcohol Toxicity) ने शरीर के अंगों पर इतना घातक असर किया कि इलाज के लिए भी समय नहीं मिला। यह तथ्य स्पष्ट करता है कि राज्य में न केवल शराब बेची जा रही है, बल्कि मिलावटी और एक्सपायर्ड स्टॉक खपाकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

प्रशासन की सक्रियता और एफएसएल की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी संजय पांडेय और स्थानीय एसडीओ ने बुधवार को स्वयं गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। एएसपी ने बताया कि (Forensic Investigation Process) को तेज करने के लिए एफएसएल की टीम गठित कर दी गई है। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही परिजनों ने बालेश्वर साह का अंतिम संस्कार कर दिया था, जिससे पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का अभाव जांच में एक बाधा बन सकता है। फिर भी, वैज्ञानिक साक्ष्यों और बबलू के बयानों को आधार बनाकर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

धंधेबाज फरार और गांव में पसरा सन्नाटा

जैसे ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, मुख्य आरोपी अरविंद साह उर्फ बंठा घर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस अब (Criminal Investigation Agency) की मदद से आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही है। गांव के अन्य निवासियों में इस घटना के बाद से गहरा खौफ है। लोग कैमरे पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन दबी जुबान में हर कोई शराबबंदी की विफलता पर चर्चा कर रहा है। एक तरफ सरकार सख्त कानूनों की बात करती है, तो दूसरी तरफ गांव-गांव में बिकता यह जहर व्यवस्था को चुनौती दे रहा है।

उजड़ते परिवारों का कौन होगा जिम्मेदार

बालेश्वर साह की मौत और बबलू की दिव्यांगता ने इस परिवार को सामाजिक और आर्थिक रूप से तोड़ कर रख दिया है। बबलू अब ताउम्र दूसरों के सहारे जीने को मजबूर है। (Bihar Prohibition Policy Debate) एक बार फिर सड़कों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक गरमा गई है। सवाल यह है कि जब शराब की बिक्री पर रोक है, तो फिर एक्सपायर्ड और जहरीली शराब गांवों तक कैसे पहुंच रही है? क्या स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के बिना यह गोरखधंधा फल-फूल सकता है? इन सवालों के जवाब आज बिहार की जनता तलाश रही है

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