MentalHealth – लगातार नेगेटिव सोच महिलाओं में बढ़ा सकती है कई स्वास्थ्य समस्याएं
MentalHealth – आज की व्यस्त जीवनशैली में कई महिलाएं परिवार, काम और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच खुद की मानसिक स्थिति पर ध्यान देना भूल जाती हैं। बाहर से वे सामान्य और संतुलित दिखती हैं, लेकिन भीतर चल रही चिंता, तनाव और लगातार आने वाले नकारात्मक विचार उन्हें धीरे-धीरे प्रभावित करते रहते हैं। बार-बार किसी बात को लेकर सोचते रहना, भविष्य को लेकर डर महसूस करना, खुद के बारे में नकारात्मक भाव रखना या छोटी-छोटी बातों पर चिंता करना—ये स्थितियां कई महिलाओं के लिए रोजमर्रा का अनुभव बन चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जब यह मानसिक दबाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर केवल मन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के कई कार्यों को भी प्रभावित करने लगता है।

लगातार तनाव से बढ़ सकता है हार्मोनल असंतुलन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक तनाव की स्थिति रहने पर शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन सामान्य परिस्थितियों में शरीर को तनाव से निपटने में मदद करता है, लेकिन अगर इसका स्तर लगातार ऊंचा बना रहे तो शरीर के कई संतुलन बिगड़ सकते हैं।
महिलाओं में ऐसे हालात हार्मोनल असंतुलन को जन्म दे सकते हैं, जिसके कारण मासिक चक्र अनियमित होना, त्वचा पर मुहांसे निकलना या चेहरे पर अनचाहे बाल उगना जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पेट के आसपास चर्बी बढ़ना और बार-बार कुछ खाने की इच्छा होना भी इसी बदलाव का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि मानसिक तनाव भी इन समस्याओं को बढ़ा सकता है।
थायरॉयड की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है असर
जब शरीर लगातार दबाव की स्थिति में रहता है तो वह ऊर्जा बचाने के लिए अपनी कई प्रक्रियाओं को धीमा करने लगता है। इसी कारण थायरॉयड ग्रंथि की गतिविधि भी प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति अक्सर थायरॉयड के धीमे काम करने से जुड़ी समस्याओं को जन्म देती है।
ऐसे मामलों में महिलाओं को जल्दी थकान महसूस होना, बालों का अधिक झड़ना, वजन का धीरे-धीरे बढ़ना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे शरीर के भीतर हो रहे बदलावों का संकेत मानते हैं।
मानसिक दबाव और पाचन तंत्र का संबंध
स्वास्थ्य विज्ञान में मस्तिष्क और पाचन तंत्र के बीच गहरा संबंध माना जाता है। जब व्यक्ति लगातार चिंता में रहता है या किसी बात को लेकर बहुत ज्यादा सोचता है तो इसका असर सीधे पेट पर पड़ सकता है।
इस स्थिति में गैस बनना, पेट फूलना, बार-बार डकार आना या सामान्य भोजन करने के बाद भी भारीपन महसूस होना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। कुछ लोगों में कब्ज या बार-बार ढीला पेट होने की समस्या भी देखने को मिलती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भावनाओं को दबाकर रखने से भी पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
सिरदर्द, माइग्रेन और उच्च रक्तचाप का खतरा
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहता है और अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता, तो शरीर लगातार सतर्क अवस्था में बना रहता है। इसे कई विशेषज्ञ शरीर की ‘सर्वाइवल मोड’ स्थिति कहते हैं।
इस तरह की अवस्था लंबे समय तक बनी रहे तो सिरदर्द, माइग्रेन, बेचैनी और रक्तचाप बढ़ने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कई बार लोगों को बिना किसी स्पष्ट कारण के घबराहट या बेचैनी महसूस होने लगती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक दबाव का प्रभाव शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है।
भावनात्मक खान-पान से बढ़ सकता है वजन
लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर के कुछ अन्य हार्मोन भी प्रभावित होते हैं। जब कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है तो मीठा या ज्यादा कैलोरी वाला भोजन खाने की इच्छा भी बढ़ सकती है। इसके साथ ही खुशी और संतोष से जुड़े हार्मोन का स्तर कम होने पर बार-बार कुछ खाने की आदत विकसित हो सकती है।
इस स्थिति को कई विशेषज्ञ भावनात्मक खान-पान की प्रवृत्ति से जोड़ते हैं। इसमें व्यक्ति भूख के कारण नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति के कारण बार-बार खाने लगता है। अगर यह आदत लंबे समय तक बनी रहे तो वजन बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।
भावनाओं को दबाने के बजाय समझना जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल विचार अपने आप में बीमारी का कारण नहीं बनते। लेकिन यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे और व्यक्ति अपनी भावनाओं को लगातार दबाकर रखे, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे शरीर पर दिखाई देने लगता है।
ऐसी स्थिति में हार्मोन संतुलन, पाचन तंत्र, रक्तचाप और ऊर्जा स्तर सभी प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए केवल शारीरिक लक्षणों का इलाज करने के बजाय मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार खुलकर अपनी भावनाएं साझा करना, नियमित दिनचर्या अपनाना और मानसिक आराम के लिए समय निकालना स्वास्थ्य संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।



