ParliamentDebate – निशिकांत दुबे ने लोकसभा में सुनाया ओवैसी से जुड़ा अनुभव
ParliamentDebate – लोकसभा की कार्यवाही के दौरान हाल ही में एक दिलचस्प पल देखने को मिला, जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने संबोधन में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से जुड़ा एक व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। सदन में बोलते हुए दुबे ने बताया कि उनके और ओवैसी के राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन कई मौकों पर दोनों के बीच संवाद और आपसी सम्मान की भावना बनी रहती है।

उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि जिस पायजामा-कुर्ते में वह उस दिन सदन में उपस्थित हुए थे, वह उन्हें ओवैसी ने ईद के अवसर पर भेंट किया था। दुबे ने यह भी कहा कि ओवैसी कभी उन्हें टोपी पहनने के लिए नहीं कहते और वह भी उन्हें टीका लगाने के लिए मजबूर नहीं करते। उनके अनुसार, किसी विशेष प्रतीक को अपनाने से किसी व्यक्ति की पहचान नहीं बदलती।
विचारों में मतभेद, लेकिन देश के मुद्दों पर साथ
अपने वक्तव्य में दुबे ने कहा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और वैचारिक रूप से उनकी पृष्ठभूमि अलग है। उन्होंने कहा कि उनकी और ओवैसी की राजनीतिक सोच कई मामलों में भिन्न है और इसे उन्होंने एक नदी के दो किनारों जैसा बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब देश से जुड़े मुद्दों की बात आती है, तो अलग-अलग विचारधारा के लोग भी एक साथ खड़े हो सकते हैं।
दुबे के इस बयान के दौरान सदन में मौजूद कई सदस्यों के बीच हल्की मुस्कान और प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। उनका कहना था कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर होना चाहिए।
सऊदी अरब यात्रा से जुड़ा अनुभव साझा
सदन में बोलते हुए निशिकांत दुबे ने एक पुराने दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक बार वह और असदुद्दीन ओवैसी एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में सऊदी अरब गए थे। उस दौरान वहां के विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
दुबे के अनुसार, बैठक के दौरान सऊदी विदेश मंत्री ने सुझाव दिया कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। इस पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी गई।
ओवैसी से बातचीत के बाद दुबे ने रखा पक्ष
दुबे ने बताया कि उस बैठक के दौरान ओवैसी ने पहले अपनी ओर से भारत का दृष्टिकोण समझाने की कोशिश की। जब बातचीत आगे बढ़ी तो उन्होंने दुबे से भी इस विषय पर अपनी राय रखने को कहा। इसके बाद दुबे ने वहां मौजूद अधिकारियों के सामने भारत की स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की एकजुटता और स्पष्ट रुख महत्वपूर्ण होता है। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि जब विदेश यात्राओं पर जाते हैं, तो वहां वे पार्टी नहीं बल्कि देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
लोकतांत्रिक संवाद की झलक
लोकसभा में दिया गया यह वक्तव्य राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद और सहयोग की संभावना को भी दर्शाता है। दुबे ने कहा कि विचारों का अंतर लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में आपसी सम्मान और बातचीत की परंपरा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
संसद में हुई इस चर्चा ने यह भी संकेत दिया कि अलग-अलग दलों के नेता कई बार निजी स्तर पर संवाद और सहयोग बनाए रखते हैं। ऐसे उदाहरण लोकतांत्रिक व्यवस्था की परिपक्वता को भी दर्शाते हैं, जहां मतभेद होने के बावजूद राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सामूहिक दृष्टिकोण अपनाने की बात सामने आती है।



