HormuzStrait – ईरान के नए नेता का संकेत, दबाव बढ़ाने को बंद हो सकता है मार्ग
HormuzStrait – मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक अहम संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है। पद संभालने के बाद उनका यह पहला सार्वजनिक संदेश माना जा रहा है, जिसे गुरुवार को ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित किया गया। ऐसे समय में यह बयान सामने आया है जब फारस की खाड़ी में जहाजों और ऊर्जा ढांचे पर बढ़ती घटनाओं के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही दबाव में है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे कई देशों की आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दबाव के साधन के रूप में बताया
अपने संबोधन में मोजतबा खामेनेई ने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्पों पर विचार करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखना विरोधी देशों पर दबाव बनाने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए इसे एक मजबूत कूटनीतिक और रणनीतिक साधन के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने का पक्षधर है। इसके बावजूद, उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को लेकर ईरान की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अमेरिकी सैन्य अड्डों को हटाने की मांग
अपने संबोधन के दौरान खामेनेई ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को हटाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इन ठिकानों की मौजूदगी क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाती है और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी सैन्य ढांचे को हटाने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो ईरान उन ठिकानों को निशाना बना सकता है। उनके मुताबिक ईरान की रणनीति का केंद्र केवल अमेरिकी सैन्य सुविधाएं हैं और इस नीति को जारी रखा जाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान उस समय आया है जब पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। तेल आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
युद्ध की स्थिति से मानवीय संकट गहराने की आशंका
इसी बीच संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय ने भी ईरान की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। संगठन के अनुसार हालिया संघर्ष और सैन्य गतिविधियों के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं।
यूएनएचसीआर के आपातकालीन सहायता दल के प्रमुख और मध्य पूर्व शरणार्थी प्रतिक्रिया समन्वयक अयाकी इतो ने बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 6 लाख से 10 लाख परिवार अस्थायी रूप से अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। यदि परिवार के औसत आकार को देखा जाए तो यह संख्या लगभग 32 लाख लोगों तक पहुंचती है।
उन्होंने कहा कि स्थिति अभी भी बदलती हुई है और अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो प्रभावित लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।
राजधानी और बड़े शहरों से पलायन की रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के अनुसार कई लोग सुरक्षा की तलाश में राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों से देश के अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले उत्तरी और ग्रामीण इलाकों की ओर जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में अस्थायी रूप से शरण लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
यूएनएचसीआर ने यह भी बताया कि ईरान में पहले से रह रहे शरणार्थी समुदाय, खासकर अफगान नागरिक, भी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं। राहत एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव में कमी नहीं आती है तो इसके असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा बाजार, वैश्विक व्यापार और मानवीय स्थिति पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।



