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InternetCables – मध्य पूर्व तनाव के बीच समुद्री केबलों पर बढ़ा खतरा

InternetCables – मध्य पूर्व में जारी तनाव अब केवल तेल और गैस आपूर्ति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका असर वैश्विक डिजिटल नेटवर्क पर भी पड़ सकता है। ताज़ा घटनाक्रमों ने समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर दुनियाभर में इंटरनेट सेवाओं के साथ-साथ बैंकिंग और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दिखाई दे सकता है।

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हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब बने संवेदनशील क्षेत्र
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर का बाब-अल-मंदेब मार्ग इस समय सबसे अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं। ये दोनों समुद्री रास्ते न केवल ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके नीचे अंतरराष्ट्रीय फाइबर ऑप्टिक केबलों का बड़ा नेटवर्क भी मौजूद है। हालिया घटनाओं ने इन इलाकों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

समुद्री गतिविधियों से बढ़ी चिंता
कुछ दावों में कहा गया है कि हॉर्मुज क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां बढ़ने से शिपिंग और बीमा कंपनियां सतर्क हो गई हैं। वहीं, लाल सागर में जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे जोखिम और बढ़ गया है। इन परिस्थितियों में समुद्र के तल पर मौजूद केबलों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि ये इलाक़े सीधे तौर पर उन्हीं के ऊपर स्थित हैं।

वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ हैं ये केबलें
समुद्र के भीतर बिछी ये फाइबर केबलें आधुनिक डिजिटल दुनिया की आधारशिला मानी जाती हैं। वीडियो कॉल, ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड सेवाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तमाम सेवाएं इन्हीं नेटवर्क के जरिए संचालित होती हैं। हजारों किलोमीटर लंबी ये केबलें महाद्वीपों को जोड़ती हैं और डेटा ट्रांसफर को संभव बनाती हैं।

कम गहराई वाले क्षेत्रों में जोखिम ज्यादा
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों में समुद्र की गहराई अपेक्षाकृत कम है, जिससे केबलों को नुकसान पहुंचाना तकनीकी रूप से आसान हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे इलाकों में किसी भी तरह की समुद्री गतिविधि या टकराव का असर सीधे केबल नेटवर्क पर पड़ सकता है, जिससे व्यापक स्तर पर सेवाएं बाधित हो सकती हैं।

महत्वपूर्ण केबल नेटवर्क का फैलाव
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लाल सागर और हॉर्मुज क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग 20 प्रमुख केबल मौजूद हैं। इनमें से कई केबल यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच डेटा कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती हैं। हॉर्मुज से गुजरने वाली प्रमुख लाइनों में एएई-1, फाल्कन, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल और टाटा-टीजीएन गल्फ शामिल हैं, जो भारत समेत कई देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत और वैश्विक सेवाओं पर संभावित असर
यदि इन केबलों में व्यवधान आता है, तो इसका असर भारत सहित कई देशों की इंटरनेट सेवाओं पर पड़ सकता है। खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, बड़े टेक कंपनियों के डाटा सेंटर भी इसी नेटवर्क पर निर्भर हैं, जिससे क्लाउड सेवाओं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है।

डिजिटल ढांचे की बढ़ती अहमियत
आज के समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा डिजिटल नेटवर्क पर आधारित है। ऐसे में समुद्र के नीचे बिछे ये केबल केवल तकनीकी संरचना नहीं, बल्कि वैश्विक संचार और आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा बन चुके हैं। मौजूदा हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इन नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता बनता जा रहा है।

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