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स्पोर्ट्स

IPLRules – मोटे बल्ले पर अंपायर की सख्ती, तेवतिया को बदलना पड़ा बैट

IPLRules – आईपीएल में इस सीजन एक दिलचस्प और चर्चा में रहने वाला मामला तब सामने आया, जब गुजरात टाइटन्स के ऑलराउंडर राहुल तेवतिया को मैदान पर ही अपना बल्ला बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। अंपायरों ने उनके बैट की जांच की और पाया कि वह तय मानकों के अनुरूप नहीं है। इसके बाद उन्हें तुरंत नया बल्ला लेने को कहा गया। इस घटना ने क्रिकेट फैंस के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर बल्लेबाजों के बल्ले को लेकर नियम क्या हैं और अगर कोई खिलाड़ी इनका उल्लंघन करता है तो क्या कार्रवाई होती है।

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मैदान पर ही हुआ बैट का परीक्षण

आईपीएल में अब तकनीकी निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो गई है। मैच के दौरान अंपायरों के पास एक विशेष उपकरण होता है, जिसे बैट गेज कहा जाता है। इसी के जरिए बल्ले की मोटाई और चौड़ाई को मापा जाता है। तेवतिया के बैट को जब इस गेज से जांचा गया, तो वह निर्धारित सीमा से अधिक मोटा पाया गया।

सूत्रों के अनुसार, तेवतिया ने अपनी तरफ से यह समझाने की कोशिश की कि बल्ले पर लगे स्टिकर की वजह से गेज ठीक से पार नहीं हो पा रहा था। हालांकि, अंपायरों ने किसी भी तरह की ढील नहीं दी और नियमों के मुताबिक उन्हें तुरंत बल्ला बदलने के निर्देश दिए। खिलाड़ी ने भी बिना बहस किए नया बैट लेकर खेल जारी रखा।

कब और कैसे होता है बैट चेक

आईपीएल में 2025 सीजन से बैट चेकिंग को और सख्त बना दिया गया है। अब सिर्फ मैच शुरू होने से पहले ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर आने से पहले और मैच के दौरान भी कभी भी बल्ले की जांच की जा सकती है। यह जांच फील्ड अंपायर या चौथे अंपायर द्वारा की जाती है।

इस व्यवस्था का मकसद खेल में निष्पक्षता बनाए रखना है, ताकि कोई भी खिलाड़ी तकनीकी लाभ लेकर अनुचित बढ़त न हासिल कर सके। क्रिकेट के आधुनिक दौर में जहां बैट की डिजाइन और तकनीक तेजी से बदल रही है, वहां इस तरह की निगरानी जरूरी मानी जा रही है।

क्या कहते हैं बल्ले से जुड़े आधिकारिक नियम

क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था एमसीसी ने बल्ले के आकार और मोटाई को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं। इन नियमों के अनुसार बल्ले की अधिकतम मोटाई 67 मिलीमीटर तक ही हो सकती है, जबकि किनारों की मोटाई 40 मिलीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

इसी मानक को जांचने के लिए बैट गेज का इस्तेमाल किया जाता है। अगर बल्ला इस गेज से आसानी से पार नहीं होता, तो उसे अवैध माना जाता है। ऐसे में बल्लेबाज को तुरंत वैध बल्ला इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है।

क्या मिलती है सजा, जानिए नियम

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि अगर किसी खिलाड़ी का बल्ला नियमों के खिलाफ पाया जाता है तो क्या उसे कोई सजा मिलती है। फिलहाल नियमों के अनुसार पहली बार ऐसी स्थिति आने पर खिलाड़ी को सिर्फ बल्ला बदलने के लिए कहा जाता है। इस पर कोई रन पेनल्टी या मैच से बाहर करने जैसी कार्रवाई नहीं होती।

हालांकि, अगर कोई खिलाड़ी बार-बार ऐसे अवैध बल्ले के साथ पकड़ा जाता है, तो यह आचरण संहिता के उल्लंघन के तहत आ सकता है। ऐसी स्थिति में खिलाड़ी की मैच फीस का एक बड़ा हिस्सा, जो 50 प्रतिशत तक हो सकता है, काटा जा सकता है। इसके अलावा अंपायर और मैच रेफरी आगे की कार्रवाई भी तय कर सकते हैं।

खेल की निष्पक्षता पर बढ़ी निगरानी

आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में जहां हर रन और हर गेंद का महत्व होता है, वहां इस तरह के नियमों का पालन बेहद जरूरी हो जाता है। बैट चेकिंग जैसे कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि मुकाबला पूरी तरह निष्पक्ष रहे और किसी भी टीम को अनुचित फायदा न मिले।

राहुल तेवतिया का यह मामला इसी सख्ती का एक उदाहरण है, जिसने साफ कर दिया है कि अब मैदान पर नियमों से समझौता करने की कोई गुंजाइश नहीं है। आने वाले मैचों में भी इस तरह की जांच जारी रहने की संभावना है, जिससे खिलाड़ियों को और सतर्क रहना होगा।

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