PlasticPackaging – बढ़ती लागत से जूझ रही है पैकिंग इंडस्ट्री, उपभोक्ता भी प्रभावित
PlasticPackaging – प्लास्टिक पैकिंग पर निर्भर उद्योग इन दिनों कई स्तरों पर दबाव झेल रहे हैं। खासतौर पर नमकीन, पापड़ और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों के सामने लागत और आपूर्ति दोनों की चुनौती खड़ी हो गई है। पहले जहां ये इकाइयाँ गैस सिलेंडर की कमी और रिफाइंड तेल के महंगे होने से परेशान थीं, वहीं अब पैकिंग मटेरियल की कीमतों में तेज उछाल ने स्थिति और जटिल बना दी है। कारोबारी मानते हैं कि अगर यही हाल रहा तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।

पैकिंग मटेरियल के दाम में तेज उछाल
नमकीन उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि प्लास्टिक पैकिंग की लागत अचानक बढ़ गई है। पहले जो मटेरियल 20 हजार रुपये में मिल जाता था, अब उसी के लिए करीब 30 हजार रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। सप्लायर एडवांस भुगतान की शर्त भी रख रहे हैं, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। अलग-अलग शहरों से आने वाले पैकिंग मटेरियल की कीमतों में डेढ़ गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कच्चे माल की कमी से उत्पादन पर असर
सिर्फ कीमतें ही नहीं बढ़ीं, बल्कि कई जगह कच्चे माल की उपलब्धता भी घट गई है। प्लास्टिक दाने की कमी के चलते कुछ इकाइयों में उत्पादन तक रोकना पड़ा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले जहां सप्लायर उधार पर भी माल दे देते थे, अब भुगतान पहले करना पड़ रहा है। इससे नकदी प्रवाह पर असर पड़ रहा है और छोटे कारोबारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी
इन हालात का असर सीधे बाजार में दिखाई देने लगा है। नमकीन और पापड़ जैसे उत्पादों की कीमतों में प्रति किलो 10 से 15 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि प्लास्टिक, गैस और तेल की लागत बढ़ने से उत्पाद महंगे होना स्वाभाविक है। दुकानदार भी मानते हैं कि लगातार बढ़ती लागत के कारण कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल होता जा रहा है।
पॉलीथिन और पैकिंग सामग्री भी महंगी
छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के लिए भी स्थिति आसान नहीं है। चाय और अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदार बताते हैं कि पॉलीथिन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। पहले जो पॉलीथिन 120 रुपये प्रति किलो मिलती थी, अब 170 से 180 रुपये तक पहुंच गई है। सप्लायर्स की ओर से आगे और बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है।
कोल्ड ड्रिंक और पानी की बोतलों पर असर
प्लास्टिक की महंगाई का असर अब पेय पदार्थों पर भी दिखने लगा है। कोल्ड ड्रिंक और मिनरल वाटर की बोतलों की पैकिंग लागत बढ़ने से कंपनियों ने डीलरों के स्तर पर कीमतें बढ़ा दी हैं। प्रति गत्ता 10 से 15 रुपये तक की वृद्धि की गई है। हालांकि फिलहाल खुदरा बाजार में इसका पूरा असर नहीं दिख रहा, लेकिन भविष्य में कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
उद्योग पर बढ़ता आर्थिक दबाव
पानी की बोतल बनाने वाले उद्यमियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमत एक महीने में ही 120 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 180 रुपये तक पहुंच गई है। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और एक बोतल पर खर्च भी पहले की तुलना में ज्यादा हो गया है। कुल मिलाकर, पैकिंग उद्योग पर बढ़ता यह दबाव आने वाले समय में बाजार की कीमतों को और प्रभावित कर सकता है।



