उत्तर प्रदेश

SmartMeter – यूपी में उपभोक्ताओं की शिकायतों पर बड़ा अभियान शुरू

SmartMeter – उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच बिजली विभाग ने अब बड़े स्तर पर पहल शुरू की है। पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. आशीष कुमार गोयल ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं की संतुष्टि सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में पूरे प्रदेश में सात दिनों का विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं का मौके पर समाधान करने पर जोर रहेगा।

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कटे कनेक्शनों की होगी जमीनी स्तर पर पड़ताल

अभियान के तहत उन उपभोक्ताओं पर खास ध्यान दिया जाएगा, जिनका कनेक्शन बैलेंस खत्म होने के कारण स्वतः बंद हो गया है और उन्होंने दोबारा रिचार्ज नहीं कराया। बिजली विभाग के कर्मचारी ऐसे उपभोक्ताओं के घर जाकर उनसे सीधे बातचीत करेंगे। इसका उद्देश्य यह समझना है कि कहीं तकनीकी जानकारी की कमी, असुविधा या किसी अन्य कारण से लोग रिचार्ज नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि कहीं अवैध तरीके से बिजली उपयोग तो नहीं हो रहा।

रिचार्ज के बाद बिजली न मिलने पर सख्ती

विभाग के पास लगातार ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि रिचार्ज करने के बावजूद बिजली बहाल नहीं होती। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे हर मामले की गंभीरता से जांच की जाए। साथ ही डिस्कॉम स्तर पर रोजाना समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रिचार्ज के बाद कनेक्शन तुरंत सक्रिय हो। अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी रखने और उपभोक्ताओं को स्पष्ट जवाब देने के लिए भी कहा गया है।

गलत बिलिंग पर सख्त निगरानी

बिजली विभाग ने बिलिंग से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर भी कड़ा संदेश दिया है। स्पष्ट किया गया है कि गलत बिल जारी करने की स्थिति में संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। टोल-फ्री नंबर 1912 पर आने वाली शिकायतों की अब दैनिक समीक्षा होगी, ताकि समस्याओं का समय रहते समाधान हो सके और उपभोक्ताओं को राहत मिले।

लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई

अभियान के दौरान उन अधिकारियों की पहचान भी की जा रही है, जिनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि राजस्व वसूली और उपभोक्ता सेवा में लापरवाही बरतने वाले अभियंताओं और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसमें विभिन्न स्तरों के इंजीनियरों को जवाबदेह बनाया जाएगा, ताकि व्यवस्था में सुधार लाया जा सके।

उपभोक्ता परिषद ने उठाई नई मांग

इस बीच, उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर को लेकर अपनी चिंताएं भी दोहराई हैं। परिषद का कहना है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिना सहमति के प्रीपेड मोड में बदल दिए गए हैं, जिससे लोगों को असुविधा हो रही है। परिषद ने मांग की है कि ऐसे करीब 70 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन को फिर से पोस्टपेड व्यवस्था में बदला जाए।

सरकार के निर्देशों से बढ़ी उम्मीद

हाल ही में मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा बैठक के बाद इस मुद्दे पर सक्रियता बढ़ी है। उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों से व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है। अगर अभियान प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो स्मार्ट मीटर से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान संभव हो सकता है।

आने वाले दिनों पर सबकी नजर

अब देखना होगा कि यह विशेष अभियान जमीन पर कितना असर दिखाता है। बिजली विभाग के लिए यह एक अहम परीक्षा की तरह है, जहां उसे तकनीकी सुधार के साथ-साथ उपभोक्ताओं का भरोसा भी जीतना होगा। आने वाले दिनों में इस पहल के परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आ सकते हैं।

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