ChildMarriageCase – पिथौरागढ़ में प्रसव के दौरान खुला बाल विवाह का मामला
ChildMarriageCase – उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक गंभीर सामाजिक और कानूनी मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग किशोरी के गर्भवती होने और अस्पताल पहुंचने के बाद बाल विवाह का खुलासा हुआ। महज 14 वर्ष की इस लड़की को प्रसव पीड़ा के चलते जिला महिला अस्पताल लाया गया था। जांच के दौरान उसकी उम्र सामने आई, जिसके बाद पूरे मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

अस्पताल में जांच के दौरान सामने आई सच्चाई
बताया गया कि कुछ लोग किशोरी को प्रसव के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों ने जब नियमित प्रक्रिया के तहत उसके दस्तावेजों की जांच की, तो पता चला कि उसकी जन्म तिथि वर्ष 2012 की है। इससे स्पष्ट हुआ कि वह अभी नाबालिग है। इस जानकारी के बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने साथ आए लोगों से पूछताछ की और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी।
किशोरी की हालत बनी हुई है नाजुक
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, किशोरी की शारीरिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। देर शाम तक उसका प्रसव नहीं हो पाया था और वह लगातार दर्द में थी। चिकित्सा टीम उसकी निगरानी कर रही है, लेकिन उसकी कम उम्र के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। अस्पताल सूत्रों ने यह भी बताया कि किशोरी मानसिक रूप से बेहद डरी हुई है और ठीक से बातचीत करने की स्थिति में नहीं है।
कथित पति पर पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज
पुलिस जांच में सामने आया है कि किशोरी का विवाह कथित रूप से करीब एक वर्ष पहले हुआ था, जब उसकी उम्र लगभग 13 साल थी। विवाह के बाद वह अपने पति के घर रहने लगी थी और इसी दौरान गर्भवती हो गई। पुलिस ने इस मामले में किशोरी के कथित पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी स्वयं भी नाबालिग हो सकता है, जिसकी पुष्टि के लिए उसके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
जांच में अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं हो सकता। बाल विवाह जैसी घटना में परिवार और अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है। इसलिए जांच के दायरे को बढ़ाया गया है और उन सभी लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने इस विवाह को संभव बनाया या इसमें सहयोग किया। आने वाले दिनों में कुछ और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
एक साल तक छिपा रहा मामला, अब उठा सवाल
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह पूरा मामला करीब एक साल तक छिपा रहा। गांव में इस विवाह और गर्भावस्था की जानकारी होने के बावजूद इसे कानून से दूर रखा गया। यह स्थिति समाज में अब भी मौजूद जागरूकता की कमी और परंपराओं के दबाव को दर्शाती है। प्रशासन द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद ऐसे मामले सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।
अकेले संघर्ष कर रही किशोरी, परिवार भी सहमा
अस्पताल में भर्ती किशोरी इस समय बेहद कठिन दौर से गुजर रही है। वह न सिर्फ शारीरिक पीड़ा झेल रही है, बल्कि मानसिक रूप से भी दबाव में है। साथ आए परिजन भी इस घटना के बाद असमंजस में हैं और कई रिश्तेदारों ने दूरी बना ली है। बताया जा रहा है कि कथित पति भी इस समय उसके साथ मौजूद नहीं है, जिससे स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है।
पुलिस का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



