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FuelPrices – पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, शहरों में जानिए ताजा दरें

FuelPrices – बुधवार को भी देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने लगातार कीमतों को स्थिर रखा हुआ है, जिससे उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत बनी हुई है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2022 के बाद से सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में कोई संशोधन नहीं किया है।

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प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें

देश के अलग-अलग महानगरों में पेट्रोल के दाम अलग-अलग स्तर पर बने हुए हैं। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 103.49 रुपये प्रति लीटर है, जबकि कोलकाता में यह 104.99 रुपये तक पहुंची हुई है। चेन्नई में पेट्रोल 100.79 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। दक्षिण और पश्चिम भारत के अन्य शहरों में भी दरें ऊंचे स्तर पर हैं, जैसे हैदराबाद में 107.45 रुपये और बेंगलुरु में 102.90 रुपये प्रति लीटर। कीमतों में यह अंतर स्थानीय करों और वैट के कारण देखने को मिलता है।

डीजल के रेट में भी कोई बदलाव नहीं

डीजल की कीमतों में भी स्थिरता बनी हुई है। दिल्ली में डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में यह 90.03 रुपये, कोलकाता में 92.02 रुपये और चेन्नई में करीब 92.48 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है। वहीं, हैदराबाद में डीजल 95.70 रुपये और बेंगलुरु में 90.99 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। लगातार स्थिर कीमतें परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए कुछ हद तक राहत लेकर आई हैं।

निजी कंपनियों ने बढ़ाई थीं कीमतें

जहां सरकारी कंपनियां कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, वहीं निजी क्षेत्र की कंपनियों ने पहले ही दाम बढ़ा दिए थे। 1 अप्रैल को शेल इंडिया ने पेट्रोल के दाम में 7.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 25.01 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इससे पहले नायरा एनर्जी ने भी पेट्रोल में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। निजी कंपनियों की इस रणनीति ने बाजार में प्रतिस्पर्धा और मूल्य निर्धारण पर सवाल खड़े किए हैं।

सरकारी कंपनियों पर बढ़ता दबाव

सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—कीमतों को स्थिर रखने के कारण वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 18 रुपये और डीजल पर करीब 35 रुपये का नुकसान हो रहा है। कीमतों को विनियमन-मुक्त किए जाने के बावजूद कंपनियां लंबे समय से खुदरा दरों में बदलाव नहीं कर रही हैं, जिससे उनका घाटा लगातार बढ़ रहा है।

वैश्विक बाजार का असर और नुकसान का आंकड़ा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ समय से भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं, जबकि बाद में यह गिरकर करीब 70 डॉलर तक आ गईं। हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद कीमतों में फिर तेजी आई और यह लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों पर पड़ा है। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले तक ये कंपनियां रोजाना करीब 2400 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही थीं, जो अब घटकर लगभग 1600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है। यह कमी सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद संभव हुई, हालांकि इसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा।

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