MembershipDrive – 50 रुपये में जुड़ाव, कांग्रेस ने शुरू किया ‘सृजन साथी’ अभियान
MembershipDrive – बिहार की राजनीति में लंबे समय से सीमित सक्रियता के आरोप झेल रही कांग्रेस अब संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की दिशा में सक्रिय नजर आ रही है। पटना स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने ‘सृजन साथी’ नाम से एक नए जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की घोषणा की। इस पहल के जरिए पार्टी डिजिटल माध्यम और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश कर रही है, ताकि आम लोगों की भागीदारी को सीधे संगठन से जोड़ा जा सके।

कम शुल्क में जुड़ाव का नया मॉडल
इस अभियान की सबसे खास बात इसकी सदस्यता फीस और अवधि को लेकर है। कांग्रेस ने इसे आम लोगों के लिए बेहद सुलभ बनाते हुए मात्र 50 रुपये में पंजीकरण की सुविधा दी है। एक बार सदस्य बनने के बाद यह सदस्यता पांच वर्षों तक वैध रहेगी। पार्टी का कहना है कि इस तरह प्रति वर्ष औसतन केवल 10 रुपये खर्च कर कोई भी व्यक्ति पार्टी की विचारधारा से जुड़ सकता है। यह मॉडल खासकर उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो राजनीतिक रूप से सक्रिय होना चाहते हैं लेकिन आर्थिक रूप से सीमित हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता पर जोर
इस पहल को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक मोबाइल ऐप का सहारा लिया है। बीपीसीसी ऐप के जरिए सदस्यता प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी, जिससे डेटा प्रबंधन और संवाद दोनों आसान होंगे। इस व्यवस्था से जमीनी कार्यकर्ताओं को सीधे शीर्ष नेतृत्व से संवाद का अवसर मिलेगा। हालांकि, सदस्य बनने के लिए यह अनिवार्य है कि आवेदक बिहार का पंजीकृत मतदाता हो।
सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश
कांग्रेस ने इस अभियान में सामाजिक संतुलन को भी प्राथमिकता दी है। पंजीकरण प्रक्रिया में महिलाओं, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति-जनजाति और दिव्यांगों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। पार्टी का उद्देश्य है कि संगठन में हर वर्ग की समान भागीदारी हो और प्रतिनिधित्व संतुलित तरीके से बढ़े। इससे न केवल सामाजिक आधार मजबूत होगा, बल्कि संगठन की स्वीकार्यता भी व्यापक स्तर पर बढ़ेगी।
कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच दूरी कम करने की पहल
पार्टी के भीतर लंबे समय से यह मुद्दा उठता रहा है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की आवाज शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पाती। ‘सृजन साथी’ अभियान इसी कमी को दूर करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। राजेश राम ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को अधिक सहभागी बनाना है, जिससे कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में अपनी भूमिका महसूस हो सके।
राजनीतिक नजरिए से क्या संकेत मिलते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस का यह प्रयास केवल सदस्यता अभियान नहीं बल्कि एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसे छोटे स्तर की आर्थिक भागीदारी और बड़े स्तर के जनसंपर्क का मिश्रण माना जा रहा है। कम शुल्क के कारण अधिक लोग जुड़ सकते हैं, वहीं लंबी सदस्यता अवधि उन्हें पार्टी के साथ लंबे समय तक जोड़े रखने में मदद कर सकती है।
अन्य दलों से प्रतिस्पर्धा की चुनौती
बिहार में पहले से ही कई दल डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने संगठन को मजबूत कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह नया प्रयोग कितना असरदार साबित होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। हालांकि, यह जरूर माना जा रहा है कि यदि यह अभियान जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचता है, तो पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है और चुनावी तैयारियों में भी मदद मिल सकती है।