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WaterTreaty – सिंधु जल समझौते पर भारत के फैसले का दिखने लगा असर

WaterTreaty – पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन उस घटना के बाद लिए गए भारत के रणनीतिक फैसलों के प्रभाव अब धीरे-धीरे स्पष्ट होते जा रहे हैं। खासतौर पर सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के निर्णय ने क्षेत्रीय जल प्रबंधन की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। बीते एक साल में भारत ने जिन परियोजनाओं और ढांचागत तैयारियों पर काम किया, उनका असर अब सीमापार भी महसूस किया जा रहा है।

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एक साल में बदली जमीनी स्थिति

हमले के तुरंत बाद पानी रोकना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था, लेकिन भारत ने दीर्घकालिक रणनीति पर तेजी से काम शुरू किया। इस दौरान जल संसाधनों के बेहतर उपयोग, भंडारण क्षमता बढ़ाने और नदियों के प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में कई कदम उठाए गए। अब स्थिति यह है कि सिंधु बेसिन से जुड़े जल प्रवाह पर भारत की पकड़ पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत हो गई है, जिससे पाकिस्तान के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।

सिंधु बेसिन में बढ़ता नियंत्रण

रावी, सतलुज और ब्यास जैसी नदियों से पाकिस्तान को मिलने वाला पानी पहले कुल प्रवाह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। अब इन नदियों पर नियंत्रण मजबूत होने के कारण भारत अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग कर रहा है। इससे न केवल जल उपलब्धता के समीकरण बदले हैं, बल्कि भारत में जल विद्युत उत्पादन की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। इन परियोजनाओं के जरिए ऊर्जा क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

जम्मू-कश्मीर में नई परियोजनाओं की रफ्तार

जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर काम तेज किया गया है। इन नदियों का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की ओर बहता रहा है, लेकिन अब इनके प्रवाह को नियंत्रित करने के प्रयासों में तेजी आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दिशा में उठाए गए कदमों के कारण पाकिस्तान को मिलने वाले पानी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से किए गए विकास कार्यों का परिणाम है।

मोहरा परियोजना की रणनीतिक भूमिका

इसी क्रम में मोहरा परियोजना का भी विशेष उल्लेख किया जा रहा है। यह परियोजना भले ही बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन के लिए न हो, लेकिन इसका महत्व जल नियंत्रण के लिहाज से काफी अधिक है। इस तरह की परियोजनाएं भारत को अपने जल संसाधनों पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद कर रही हैं, जिससे सीमापार प्रभाव भी देखने को मिल रहा है।

शाहपुर कंडी बांध से मजबूत पकड़

पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित शाहपुर कंडी बांध के पूरा होने से रावी नदी के जल पर भारत का नियंत्रण पूरी तरह स्थापित हो गया है। इस बांध के जरिए अब पानी को कठुआ और सांबा जैसे क्षेत्रों की ओर मोड़ा जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर सिंचाई और जल आपूर्ति में सुधार हुआ है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की निर्भरता भी प्रभावित हुई है।

क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ता प्रभाव

इन सभी घटनाक्रमों से यह साफ है कि जल संसाधनों को लेकर भारत की नीति अब अधिक सक्रिय और रणनीतिक हो गई है। इसका असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जल प्रबंधन से जुड़ी यह नई स्थिति क्षेत्रीय संबंधों और संतुलन को किस दिशा में ले जाती है।

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