झारखण्ड

UrbanPolicy – बड़े शहरों के लिए डेटा आधारित योजना बनाने की तैयारी

UrbanPolicy – देश के तेजी से बदलते शहरी ढांचे को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार अब शहरों के विकास के लिए अधिक सटीक और तथ्य आधारित रणनीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने देश के प्रमुख शहरों के लिए विस्तृत सांख्यिकीय रिपोर्ट तैयार करने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल में उन शहरों को शामिल किया गया है जिनकी आबादी दस लाख से अधिक है।

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शहर स्तर पर डेटा की कमी बनी चुनौती

अब तक अधिकतर आर्थिक और सामाजिक आंकड़े राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर ही उपलब्ध होते रहे हैं। इससे किसी विशेष शहर की वास्तविक स्थिति को समझना कठिन हो जाता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में रोजगार, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों की सटीक तस्वीर सामने न आने से नीति निर्माण में कई बार बाधा आती है। इसी कमी को दूर करने के लिए यह नई पहल शुरू की जा रही है।

रांची और धनबाद भी शामिल

इस योजना में झारखंड के रांची और धनबाद जैसे शहरों को भी शामिल किया गया है। इन शहरों को अलग इकाई मानकर उनका विस्तृत डेटा तैयार किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य है कि इन शहरों के आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार के अवसरों को बेहतर ढंग से समझा जा सके। इसके आधार पर भविष्य की योजनाएं अधिक प्रभावी बनाई जा सकेंगी।

देशभर के 47 शहरों का चयन

इस पहल के तहत देश के कुल 47 शहरों को चुना गया है। इनमें महाराष्ट्र के सबसे अधिक शहर शामिल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के भी कई शहरों को शामिल किया गया है।

बिहार से एक शहर और झारखंड से दो शहरों का चयन किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह योजना देशभर के विभिन्न क्षेत्रों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

रिपोर्ट के दो हिस्से होंगे

तैयार की जाने वाली रिपोर्ट को दो प्रमुख भागों में विभाजित किया जाएगा। पहला भाग शहरों में रोजगार की स्थिति पर केंद्रित होगा। इसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की कार्य स्थिति, बेरोजगारी दर और अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के वितरण का अध्ययन किया जाएगा।

इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में रोजगार के अवसर अधिक हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

असंगठित क्षेत्र पर विशेष ध्यान

रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा उन गतिविधियों पर केंद्रित होगा जो औपचारिक व्यवस्था से बाहर हैं। इसमें छोटे व्यवसाय, ठेला-खोमचा चलाने वाले, निर्माण कार्य से जुड़े मजदूर और घरेलू उद्योग शामिल होंगे।

इन गतिविधियों का विश्लेषण कई संकेतकों के आधार पर किया जाएगा, जिससे उनकी वास्तविक स्थिति और चुनौतियों को समझा जा सके।

सुझाव देने का अवसर

इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले आम लोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं। इच्छुक नागरिक निर्धारित तिथि तक अपने सुझाव दे सकते हैं, ताकि योजना को और बेहतर बनाया जा सके।

सरकार का मानना है कि इस तरह की भागीदारी से नीति निर्माण अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बन सकता है।

बेहतर शहरी योजना की दिशा में कदम

यह पहल शहरों के विकास को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान करती है। सटीक आंकड़ों के आधार पर बनाई गई नीतियां न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी, बल्कि रोजगार और जीवन स्तर में भी सुधार ला सकती हैं।

आने वाले समय में इस योजना के परिणाम शहरी विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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