SmartMeterPolicy – यूपी में प्रीपेड बिजली मीटर व्यवस्था खत्म, नए नियम लागू…
SmartMeterPolicy – उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से विवाद का कारण बने स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त करते हुए अब सभी उपभोक्ताओं के लिए पोस्टपेड प्रणाली लागू करने का ऐलान किया है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत इस बदलाव की जानकारी दी। इस फैसले के बाद पहले से लगे प्रीपेड स्मार्ट मीटर भी पोस्टपेड मोड में परिवर्तित किए जाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

मासिक बिलिंग प्रणाली लागू, भुगतान के लिए तय समय
नई व्यवस्था के अनुसार अब हर महीने की 10 तारीख तक बिजली का बिल जारी किया जाएगा। उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए 15 दिनों का समय दिया जाएगा, यानी 25 तारीख तक भुगतान किया जा सकेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी उपभोक्ता पर केवल एक महीने का बकाया है, तो उसकी बिजली आपूर्ति नहीं रोकी जाएगी। इससे आम उपभोक्ताओं को अचानक बिजली कटने की समस्या से राहत मिलेगी।
बिल समय पर न मिलने पर शिकायत की सुविधा
ऊर्जा विभाग ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सभी उपभोक्ताओं तक समय पर बिल पहुंचे। यदि किसी कारणवश बिल निर्धारित तिथि तक नहीं मिलता है, तो उपभोक्ता अपने क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनी के नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खंड और उपखंड स्तर पर विशेष शिविर लगाकर बिल संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाए।
सुरक्षा राशि जमा करने का नया प्रावधान
पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के साथ ही उपभोक्ताओं को सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। पहले जब प्रीपेड मीटर लगाए गए थे, तब यह राशि वापस कर दी गई थी। अब दोबारा पोस्टपेड प्रणाली में आने पर यह राशि फिर से जमा करनी होगी। हालांकि सरकार ने उपभोक्ताओं पर एकमुश्त बोझ न पड़े, इसके लिए इसे चार किस्तों में जमा करने की सुविधा देने का निर्णय लिया है। इससे आर्थिक दबाव को कम करने का प्रयास किया गया है।
प्रीपेड मीटर को लेकर बढ़ रहा था विरोध
राज्य में कई स्थानों पर प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं में असंतोष देखा जा रहा था। लोगों का कहना था कि बिना पर्याप्त जानकारी और सहमति के यह मीटर लगाए जा रहे हैं। साथ ही, अचानक बैलेंस खत्म होने पर बिजली कटने की समस्या भी सामने आ रही थी। इस कारण कई जिलों में विरोध के स्वर तेज हो गए थे, जिसे देखते हुए सरकार ने नीति में बदलाव का निर्णय लिया।
कानूनी प्रावधान और उपभोक्ता अधिकार
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े नियमों के अनुसार, उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वे प्रीपेड या पोस्टपेड प्रणाली में से किसी एक का चयन कर सकें। केंद्रीय स्तर पर भी इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद राज्य में प्रीपेड मीटर लागू किए जाने पर सवाल उठ रहे थे। अब सरकार के नए फैसले से इन विवादों पर विराम लगने की उम्मीद है।
आगे की प्रक्रिया और संभावित प्रभाव
सरकार के इस निर्णय के बाद अब बिजली विभाग को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव करने होंगे। पुराने मीटरों को अपडेट करने और नई बिलिंग प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। माना जा रहा है कि इस बदलाव से उपभोक्ताओं और विभाग के बीच तालमेल बेहतर होगा और शिकायतों में कमी आएगी। साथ ही, बिजली बिल भुगतान की प्रक्रिया भी अधिक सरल और पारदर्शी बनने की संभावना है।