राष्ट्रीय

Congress – पांच राज्यों के नतीजों के बाद जवाबदेही पर बढ़ा दबाव

Congress – पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक समीक्षा और नेतृत्व की जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। केरल को छोड़कर बाकी राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जिसके बाद अब हार के कारणों पर मंथन की तैयारी की जा रही है। पार्टी नेतृत्व ने समीक्षा बैठकों का संकेत दिया है, लेकिन अब तक संगठन स्तर पर किसी बड़ी जिम्मेदारी तय किए जाने की तस्वीर साफ नहीं दिख रही।

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असम हार के बाद इस्तीफे पर बना असमंजस

असम चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि पार्टी ने अभी तक उनके इस्तीफे पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि चुनावी समीक्षा पूरी होने के बाद ही इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा। पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि लगातार हार के बावजूद जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों बनी हुई है।

पुराने चुनावी अनुभवों का दिया जा रहा हवाला

कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता पिछले चुनावों का उदाहरण देकर संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भी पार्टी ने समीक्षा बैठकें की थीं और नए सिरे से संगठन को मजबूत करने की बात कही गई थी। हालांकि नेताओं का मानना है कि जमीन पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दिए। संगठन सृजन कार्यक्रम के दौरान जिला अध्यक्षों और स्थानीय इकाइयों की जवाबदेही तय करने की बात जरूर कही गई थी, लेकिन उसका असर सीमित ही नजर आया।

राहुल गांधी की टिप्पणी फिर चर्चा में

पार्टी के भीतर संगठनात्मक जवाबदेही की चर्चा के बीच राहुल गांधी के पुराने बयान का भी जिक्र हो रहा है। उन्होंने नए जिला अध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा था कि संगठन में कोई भी पद स्थायी नहीं होता और कामकाज के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके बावजूद गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव और अन्य राज्यों में हार के बाद बड़े स्तर पर कोई सख्त कदम सामने नहीं आया। अब कई नेता मान रहे हैं कि बिना स्पष्ट जवाबदेही तय किए संगठन में सुधार की प्रक्रिया अधूरी रहेगी।

2027 चुनावों को लेकर बढ़ी चिंता

कांग्रेस के भीतर यह भी चर्चा है कि यदि पार्टी को आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करना है, तो संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय बनाना होगा। अप्रैल 2025 में अहमदाबाद अधिवेशन के दौरान शुरू किए गए संगठन सृजन कार्यक्रम से काफी उम्मीदें जताई गई थीं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जिला और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना था। हालांकि कई नेताओं का कहना है कि अब तक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार नहीं हो पाया है, जो चुनावी चुनौतियों का प्रभावी तरीके से सामना कर सके।

केरल में सरकार गठन की प्रक्रिया तेज

इधर केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को बहुमत मिलने के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर लगातार चर्चा चल रही है। सूत्रों के अनुसार, वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। विधायक दल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार पार्टी हाईकमान को सौंप दिया गया है।

पर्यवेक्षकों ने विधायकों से ली राय

तिरुअनंतपुरम में हुई विधायक दल की बैठक में एआईसीसी पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने प्रस्ताव रखा कि मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करे। इस प्रस्ताव को सभी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने सहमति के साथ स्वीकार किया। इसके बाद पर्यवेक्षकों ने अलग-अलग विधायकों से व्यक्तिगत बातचीत कर नेतृत्व को लेकर उनकी राय भी जानी।

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