राष्ट्रीय

Enforcement – पश्चिम बंगाल में जमीन और धनशोधन जांच में कई ठिकानों पर कार्रवाई

Enforcement – प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल में कथित मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन कब्जे से जुड़े मामलों की जांच के तहत शुक्रवार को कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दायरे में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास, कारोबारी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ और उनसे जुड़े कुछ अन्य लोगों के ठिकाने शामिल रहे। अधिकारियों ने मुर्शिदाबाद जिले के कांडी स्थित आवास समेत कई परिसरों में घंटों तक जांच की।

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मुर्शिदाबाद स्थित घर में लंबी तलाशी

ईडी की टीम ने शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर पर करीब 14 घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। देर रात जांच पूरी होने के बाद अधिकारियों ने पूरे परिसर को सील कर दिया। जांच एजेंसी ने इस दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजात अपने कब्जे में लिए। जानकारी के मुताबिक, घर की मरम्मत और निर्माण कार्य से जुड़े कुछ राजमिस्त्रियों से भी पूछताछ की गई, जो पिछले कुछ वर्षों से वहां काम कर रहे थे।

स्थानीय प्रशासन और बैंक अधिकारियों की मौजूदगी

तलाशी के दौरान जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के लिए राजस्व विभाग और रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मचारियों को भी बुलाया गया। बहरामपुर से दो बैंक अधिकारियों को मौके पर पहुंचाकर वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई गई। अंडुलिया पंचायत की प्रधान मामोनी राजबंशी को जब्त किए गए सामान की सूची पर हस्ताक्षर के लिए घटनास्थल पर मौजूद रखा गया। अधिकारियों ने पूरे मामले में संपत्तियों के स्वामित्व और आर्थिक स्रोतों की कड़ी पड़ताल की।

पूर्व पुलिस अधिकारी का घर पहले भी रहा चर्चा में

शांतनु सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी के बाद उनका मुर्शिदाबाद स्थित आलीशान मकान राज्यभर में चर्चा का विषय बना था। जांच एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि संपत्तियों के निर्माण और खरीद में इस्तेमाल धन का स्रोत क्या था। ईडी सूत्रों के अनुसार, जमीन सौदों और वित्तीय लेनदेन के कई पहलुओं की जांच अभी जारी है।

अन्य करीबी लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी

इस कार्रवाई में मोहम्मद अली उर्फ मैक्स राजू, सौरव अधिकारी और पुलिस सब-इंस्पेक्टर रुहिल अमीन अली से जुड़े ठिकानों की भी तलाशी ली गई। सौरव अधिकारी को बिस्वास का रिश्तेदार बताया जा रहा है, जबकि रुहिल अमीन अली को उनका करीबी माना जाता है। जांच एजेंसी इन सभी लोगों के बीच संभावित आर्थिक और कारोबारी संबंधों की जांच कर रही है।

पहले हुई गिरफ्तारियों से जुड़ी है जांच

ईडी ने कुछ दिन पहले ही बिस्वजीत पोद्दार को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। एजेंसी का दावा है कि पोद्दार का नाम पश्चिम बंगाल में जमीन कब्जे और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े कई मामलों में सामने आया है। वहीं कारोबारी जॉय एस कामदार को भी इसी मामले में अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क की गतिविधियां कई वर्षों से जांच के दायरे में थीं।

पुराने मामलों में भी सामने आया था नाम

बिस्वजीत पोद्दार का नाम पहली बार वर्ष 2015 में बालीगंज रेल यार्ड में हुई हिंसक घटना के बाद चर्चा में आया था। बाद के वर्षों में उस पर कई आपराधिक मामलों में संलिप्तता के आरोप लगे। इनमें 2017 का एक हत्या मामला और 2021 में प्रेसिडेंसी जेल के बाहर हुए हमले की जांच भी शामिल रही है। एजेंसियां अब इन पुराने मामलों और मौजूदा आर्थिक अपराध जांच के बीच संभावित कड़ियों को भी खंगाल रही हैं।

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