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Parliament – राज्यसभा चुनावों से बदल सकते हैं दलों के नए समीकरण

Parliament – निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव कराने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा। मतदान 18 जून को होगा। आने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है, हालांकि शुरुआती आकलन में उच्च सदन की कुल तस्वीर में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।

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कई वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल हो रहा समाप्त

अगले दो महीनों में राज्यसभा के कई मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन्हीं सीटों को भरने के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीटों पर मतदान होगा। मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटें खाली हो रही हैं, जबकि झारखंड में दो सीटों के लिए चुनाव होगा। इसके अलावा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट भी इस प्रक्रिया में शामिल है।

उपचुनाव भी रहेंगे अहम

मुख्य चुनावों के साथ महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। इन दोनों सीटों पर भी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है, क्योंकि क्षेत्रीय समीकरण यहां अहम भूमिका निभा सकते हैं। कुल मिलाकर 26 सीटों पर होने वाली इस प्रक्रिया को आगामी संसदीय रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एनडीए और कांग्रेस के लिए क्या संकेत

वर्तमान स्थिति में जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें से अधिकांश सीटें एनडीए के पास हैं। इनमें भाजपा की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा को कुछ राज्यों में नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि कांग्रेस को सीमित बढ़त मिलने की संभावना दिखाई दे रही है।

कर्नाटक में कांग्रेस की मजबूत स्थिति को देखते हुए पार्टी तीन सीटें जीत सकती है। इसी तरह मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी उसे एक-एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है। झारखंड में कांग्रेस और झामुमो गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या होने से दोनों सीटों पर संयुक्त रणनीति अहम मानी जा रही है।

झारखंड की सीटों पर खास नजर

झारखंड में गठबंधन की राजनीति इस चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकती है। राज्य में कांग्रेस, झामुमो और सहयोगी दलों के पास बहुमत का आंकड़ा है। ऐसे में दोनों सीटों पर गठबंधन उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस इनमें से एक सीट की मांग कर सकती है।

यदि ऐसा होता है, तो कांग्रेस की राज्यसभा में कुल संख्या बढ़ सकती है। इससे पार्टी को उच्च सदन में रणनीतिक रूप से कुछ मजबूती मिलने की संभावना है।

भाजपा के सामने सीटें बचाने की चुनौती

भाजपा के कई सदस्य इस बार सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विधानसभा के वर्तमान गणित को देखते हुए पार्टी उतनी ही सीटें दोबारा जीत पाएगी या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है। कुछ राज्यों में बदलते राजनीतिक समीकरण भाजपा के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं।

फिलहाल राज्यसभा में एनडीए को बहुमत हासिल है और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। चुनाव परिणामों के बाद संख्या में मामूली बदलाव संभव है, लेकिन उच्च सदन की समग्र स्थिति में किसी बड़े उलटफेर की संभावना कम मानी जा रही है।

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